अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की विशेषताएं | अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं इसके महत्व से आप क्या समझते हैं? | देश के आर्थिक विकास मे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के योगदान की व्याख्या कीजिए।
आर्थिक विकास, सही मायने में किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार होता है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो किसी देश की आय, उत्पादन, रोज़गार, तकनीकी उन्नति और जीवन स्तर में निरंतर वृद्धि को ही आर्थिक विकास कहा जाता है। और इस विकास की प्रक्रिया में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आज के वैश्वीकरण के युग में विश्व का कोई भी देश ऐसा नहीं है जो स्वयं ही आत्मनिर्भर रह सकता है। इसलिए प्रत्येक देश के आर्थिक विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, प्रमुख साधन बन चुका है जो कि उन विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान करते हुए किया जाता है। विकासशील देशों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें मशीनरी, उन्नत तकनीक और पूंजीगत वस्तुओं की आवश्यकता होती है।
विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत होने से देश की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होती है। सरल शब्दों में कहा जाए तो विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं के क्रय विक्रय की प्रक्रिया को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। विभिन्न देशों के बीच व्यापार होने के कारण इसे विदेशी व्यापार (Videshi vyapar) भी कहा जाता है।
उदाहरण के लिए भारत का अमेरिका, इंग्लैंड, जापान, फ्रांस आदि देशों के बीच किया जाने वाला व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अंतर्गत आयात व्यापार, निर्यात व्यापार तथा पुनर्नियात व्यापार शामिल होते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (International Trade) एक देश को अपने घरेलू उत्पादन से परे, विदेशी बाज़ारों तक पहुंचने, संसाधनों का अनुकूलन करने और बेहतर आर्थिक संबंध स्थापित करने में सक्षम बनाता है। यह व्यापार वैश्वीकरण की प्रक्रिया का एक मुख्य हिस्सा कहा जा सकता है।
वर्तमान में विश्व की अर्थव्यवस्था में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का एक महत्वपूर्ण स्थान है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार ने विश्व के अनेक समृद्ध देशों को उनके संपूर्ण विकास कार्य में अमूल्य सहयोग किया है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विभिन्न देशों के नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा बनाए रखने में सहायक होता है।
मार्शल के अनुसार, विदेशी व्यापार से दोहरा लाभ होता है। एक ओर तो देश में उपलब्ध साधनों का अधिकतम विदोहन किया जा सकता है दूसरी ओर विदेशों से वस्तुएं प्राप्त करके देश के नागरिकों की आवश्यकताओं को संतुष्ट किया जा सकता है। जिससे उनका जीवन स्तर ऊंचा किया जा सकता है। चलिए हम इस अंक के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लाभ (antarrashtriya vyapar ke labh) क्या हैं जानते हैं।
आर्थिक विकास में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्व (Importance of International Trade in Economic Development in hindi)
किसी भी देश के आर्थिक विकास में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (antarrashtriya vyapar) के अनेक महत्व दिखाई देते हैं उनमें से कुछ प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं -
1. भौगोलिक श्रम विभाजन एवं विशिष्टीकरण -
प्रत्येक देश के पास प्राकृतिक संसाधन, श्रम शक्ति, तकनीक और पूंजी की उपलब्धता अलग-अलग होती है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की वजह से ही प्रत्येक देश को उनके संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए कुछ ख़ास वस्तुओं के उत्पादन में विशिष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
सभी देश उन्हीं वस्तुओं का उत्पादन करते हैं जिनके लिए उनकी भौगोलिक तथा आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल होती हैं। इससे श्रमिकों की कार्यक्षमता और उत्पादन में वृद्धि होती है साथ ही उत्पादन व्यय भी कम हो जाता है। विश्व के ऐसे अनेक देश है जिन्होंने अपने संसाधनों व उपयुक्त श्रम शक्ति के अनुरूप, अपनी तुलनात्मक श्रेष्ठता के आधार पर उत्पादन करते हुए विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से लाभ भी अर्जित कर रहे हैं।
2. उत्पादन तकनीकी में सुधार -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में प्रतियोगिता के कारण प्रत्येक देश अपने उत्पादन के स्तर को बढ़ाने तथा उत्पादन लागत को कम करने का भरसक प्रयास करते हैं। इसके लिए वे उत्पादन की तकनीक में लगातार सुधार करने की कोशिश करते हैं। या फ़िर नवीन तकनीक की खोज करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के बहाने विभिन्न आपस में नई-नई तकनीक, ज्ञान और कौशल का आदान-प्रदान भी होता है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अंतर्गत विकसित देशों से नई तकनीक आयात करने से उत्पादन की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ती है तथा प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी वृद्धि होती है। साथ ही, वैश्विक प्रतिस्पर्धा घरेलू उद्योगों को बेहतर गुणवत्ता और कम लागत पर उत्पादन करने के लिए प्रेरित करती है।
3. उच्च जीवन स्तर -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण उपभोक्ताओं को वे वस्तुएं भी आसानी से और अपेक्षाकृत सस्ते दामों में मिल जाती हैं जिनका उत्पादन उनके देश में नहीं किया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उपभोक्ताओं को विविध वस्तुएं उपलब्ध कराता है। यदि कोई वस्तु किसी देश में उपलब्ध नहीं है या महंगी है, तो उसे दूसरे देश से आयात किया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता और उचित मूल्य पर वस्तुएं मिलती हैं।अपने जीवन में आवश्यकता के अनुरूप अपनी। पसंदीदा वस्तुओं को आसानी से प्राप्त करने के कारण उस देश के नागरिकों का जीवन स्तर ऊंचा हो जाता है
4. आर्थिक संकट में सहायक -
किसी देश में यदि अकाल, महामारी, युद्ध अथवा अन्य संकटकालीन स्थिति पैदा हो जाए तब ऐसी परिस्थिति में विदेशों से ज़रूरी वस्तुओं का आयात करके संकट को टाला जा सकता है। विदेशी सहायता से देश की आर्थिक स्थिति को जल्द ही सुधारा जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सहायता से विश्व में किसी भी देश में होने वाले अकालों/महामारी आदि की समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।
5. क़ीमत समानता की प्रवृत्ति -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण वस्तुओं तथा सेवाओं का क्रय-विक्रय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होता है जिससे परस्पर प्रतियोगिता के कारण सभी देशों में वस्तुओं व सेवाओं की क़ीमतों में समानता आती है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण उपभोक्ताओं को वस्तुएं लगभग समान क़ीमतों पर मिल जाती है तथा इससे एकाधिकारिक प्रवृत्तियां भी हतोत्साहित होती हैं और उपभोक्ताओं को लाभ होता है।
6. औद्योगिक विकास -
जिन देशों के पास कच्चे माल व अन्य साधनों का अभाव होता है वो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से अन्य देशों से आयात कर सकते है जिन देशों के पास ये साधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। आज के दौर में अर्द्धविकसित राष्ट्रों में औद्योगिकरण विदेशी व्यापार की सहायता से ही हो रहा है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसी भी राष्ट्र के साधनों का यदि सर्वोत्तम उपयोग किया जाना हो तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सहायक साबित होता है।
7. प्राकृतिक साधनों का समुचित प्रयोग -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अंतर्गत देश में ऐसे उद्योगों को विकसित किया जाता है जिसके लिए देश के अंदर की प्राकृतिक दशाएं सर्वाधिक अनुकूल रहती हैं। ध्यान रखा जाता है कि इन उद्योगों से संबंधित प्राकृतिक साधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों। देश में इन्हीं उद्योगों को स्थापित किया जाता है ताकि उपलब्ध प्राकृतिक साधनों का समुचित प्रयोग किया जा सके। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण ही देश में उत्पादन शक्तियां देश के प्राकृतिक साधनों का स्वतंत्रतापूर्वक समुचित प्रयोग करती हैं जिससे अधिकतम लाभ की संभावना रहती है।
8. एकाधिकारिक प्रवृत्ति पर रोक -
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के फलस्वरूप किसी भी देश में एकाधिकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती है क्योंकि विश्व के विभिन्न देशों के बीच सदैव विदेशी प्रतियोगिता का भय बना रहता है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, विभिन्न देशों के बीच एकाधिकारी प्रवृत्ति पर रोक लगाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।
9. सांस्कृतिक संबंध एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग - अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विभिन राष्ट्रों के नागरिकों को एक दूसरे के संपर्क में लाता है जिसके कारण विभिन्न राष्ट्रों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों में दृढ़ता आती है और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना बढ़ती है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय एकता में भी वृद्धि होती है।
10. श्रम-विभाजन तथा विशिष्टीकरण के लाभ -
जिस प्रकार एक देश में श्रम विभाजन को अपनाकर उत्पादक कुशलतापूर्वक अधिकतम मात्रा में उत्पादन कर सकते है उसी प्रकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भौगोलिक अथवा क्षेत्रीय श्रम विभाजन से कुल उत्पादन को अधिकतम किया जा सकता है। विश्व के जिन देशों के पास ऊंची लागतों पर वस्तुओं का उत्पादन करने की मजबूरी होती है। वे उन वस्तुओं को कम क़ीमतों पर विदेशों से सीधे आयात कर लेते हैं।
इसलिए श्रम विभाजन के कारण विभिन्न देश विशेष तौर पर उन वस्तुओं का उत्पादन करते हैं जिनमें उनकी लागत न्यूनतम होती है और उन वस्तुओं का आयात कर लेते हैं जिनकी लागत अधिक होती है। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के चलते शर्म विभाजन एवं विशिष्टिकरण के विशिष्ट लाभ ले पाते हैं।
11. बाज़ार का विस्तार -
विदेशी व्यापार के परिणामस्वरूप बाज़ार का विस्तार होता है। यदि बाज़ार देश की सीमा के भीतर तक ही सीमित रहता है तो मांग कम होती है तथा विक्रय भी कम होता है और लाभ भी कम ही रहते हैं। वस्तु का अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार होने से मांग व्यापक होती है अधिक मांग के कारण उत्पादन बढ़ता है तथा संबंधित साधनों का पूर्ण प्रयोग संभव होता है। यह विदेशी व्यापार की ताक़त ही है कि आज भारत की चाय एवं मसालों का प्रयोग विदेशों में व्यापक पैमाने पर किया जाता है।
12. रोज़गार में वृद्धि -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण ही क्षेत्रीय श्रम-विभाजन संभव होता है। परिणामतः उत्पादन एवं रोज़गार की मात्रा में वृद्धि होती है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से निर्यातक उद्योगों में उत्पादन बढ़ता है और श्रमिकों के रोज़गार में वृद्धि होती है। प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से ही अधिकतम रोज़गार संभव होता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का देश की अर्थव्यवस्था पर गुणक प्रभाव पड़ता है। इससे उस देश में आय, रोज़गार तथा उत्पादन में वृद्धि होती है।
13. राष्ट्रों के आर्थिक विकास में सहायक -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वारा एक देश तेज़ी से अपना आर्थिक विकास कर सकता है। विकासशील देशों में कुशल श्रम, मशीनें, कच्चेमाल, शक्ति के साधन तथा पूंजी का अभाव पाया जाता है। अतः विकासशील देश, अन्य विकसित देशों से इनका आयात करके देश के आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वारा विदेशी पूंजी एवं प्राकृतिक साधनों का अनुकूलतम उपयोग किया जाता है।
14. सभ्यता का विकास -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से विभिन्न देशों में, चाहे वे अविकसित, विकासशील या विकसित राष्ट्र हों, सभी का आपसी संपर्क होता है। जब अर्द्धविकसित राष्ट्र विकसित राष्ट्रों के संपर्क में आते हैं तो उनमें नए-नए तकनीकी बदलाव व अभिरुचियों का विकास होता है। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के चलते विश्व के किसी भी देश में सभ्यता का निरंतर विकास होता रहता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से मिलने वाले लाभ सभी राष्ट्रों को समान रूप से प्राप्त नहीं होते है। किसी भी देश को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से होने वाले लाभों, व्यापार की शर्तों, व्यापारिक की नीतियों, श्रम की सापेक्षिक कार्यक्षमता तथा क़ीमतों के अनुपात के अंतर द्वारा निर्धारित होती है। वैश्वीकरण के इस युग में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, विभिन्न देशों के लिए न केवल आर्थिक समृद्धि का माध्यम है, बल्कि वैश्विक सहयोग और आपसी निर्भरता का प्रतीक भी है।
आज विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थान वैश्विक व्यापार को नियंत्रित और प्रोत्साहित करने का कार्य करते हैं। विश्व व्यापार संगठन के माध्यम से विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक विवादों का समाधान किया जाता है और व्यापार को सुगम बनाने के हर संभव प्रयास किए जाते हैं। इससे वैश्विक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
अंततः हम यह कह सकते हैं कि आर्थिक विकास हेतु अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एक विशिष्ट स्तंभ है। यह उत्पादन, रोज़गार, तकनीकी विकास और विदेशी मुद्रा अर्जन को बढ़ावा देता है। यद्यपि इसके कुछ जोख़िम भी हैं, परंतु उचित नीतियों और संतुलित दृष्टिकोण के साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसी भी देश को विकास के मार्ग पर अग्रसर कर सकता है।
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