सुखी और अच्छे रिश्ते की 16 पहचान | पति पत्नी के बीच में कैसा रिश्ता होना चाहिए? जानिए 16 टिप्स!

दोस्तों! वैवाहिक जीवन कहने के लिए तो बड़ा आकर्षक और संपूर्णता से परिपूर्ण जीवन होता है। लेकिन यह जीवन तभी सुखदायक होता है जब पति-पत्नी के बीच सामंजस्य, अटूट प्रेम, विश्वास, आपसी समझ हो। वर्ना वैवाहिक जीवन कड़वाहटों से भरपूर हो जाता है। वैवाहिक जीवन कैसा हो? यह एक महत्वपूर्ण मसला है।



पति पत्नी के बीच में कैसा रिश्ता होना चाहिए? यानि कि दूसरे शब्दों में आपका रिश्ता आपके पार्टनर के साथ कैसा होना चाहिए? इस बात की पहचान कुछ संकेतों से निश्चित तौर पर की जा सकती है। पति-पत्नी के बीच में क्या रिश्ता होता है? यह जानने के लिए हमारे इस लेख के साथ बने रहिये। हम आपके साथ कुछ दिलचस्प विचार साझा करने वाले हैं। जिसे पढ़कर आप भी सहमत होंगे।पति-पत्नी का रिश्ता सबसे मज़बूत माना जाता है। लेकिन कई चीज़ें ऐसी भी होती हैं। जिन्हें महिलाएं अपने पति से अक्सर एक्सप्रेस करने में झिझक महसूस करती हैं लेकिन वे उम्मीद ज़रूर करती हैं कि उनके पति उन्हें समझें और उनका साथ दें।

पति-पत्नी के बीच का रिश्ता ऐसा होता है कि 'कपल्स एक-दूसरे की भावनाएं बिना कहे ही समझ जाते हैं।' दरअसल यह बात वास्तविक कम और काल्पनिक ज़्यादा सुनाई पड़ती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पति ख़ुद इस बात की शिकायत करते रहते हैं कि उनकी पत्नियाँ उम्मीद करती हैं कि उनके कहे बग़ैर उनकी बातों को समझ जाएं। उनकी यह सोच हमें फ्रस्टेट कर देती है। अगर आप भी ऐसे ही एक पति हैं, तो हम आपको यह बात जानने में थोड़ी मदद तो कर ही सकते हैं कि कौन सी ऐसी बातें हैं? जिन्हें लेकर हर पत्नी उम्मीद करती है कि उनका पति बिना कहे उन्हें समझ जाए!


ठीक इसी तरह की सोच पतियों की भी होती हैं कि पत्नियाँ उनकी भावनाओं को समझे और बिना कहे दिल की बात भी समझ जाएं। ऐसी कई आदतें होती हैं जिनकी वजह से पति और पत्नी के बीच में रिश्ता एक मजबूरी अथवा बोझिल रिश्ता बनकर रह जाता है। दोस्तों! क्या आपका रिश्ता भी आपके साथी के साथ कुछ ऐसा है? कहीं आप भी अपनी तरफ़ से पहल करने के बजाय अपने पार्टनर से ही सारी उम्मीद तो नहीं करते? 

यहाँ कुछ बातें हैं, जिनकी मदद से पता लगाया जा सकता है कि आपका रिश्ता अच्छा है या नहीं। नीचे बताई गई बातें आपके रिश्ते में ज़िंदा हैं, तो समझ लीजिए की आप दोनों का ही आपसी रिश्ता मज़बूत, अच्छा और अटूट है। आप इसे पढ़कर जान सकते हैं कि पति और पत्नी के बीच में कैसा रिश्ता होना चाहिए? तो चलिए जानते हैं कि असल में पति पत्नी के बीच के रिश्ते की कुछ ख़ास पहचान क्या है!


(1) मन की बातों को बेझिझक कहें-


पति-पत्नी के बीच का रिश्ता लाजवाब तब बनता है जब दोनों ही बेझिझक होकर अपने दिल की बात एक दूसरे से कहना सीख जायें। पति-पत्नी के बीच के रिश्ते इसी वजह से ज़्यादा बिगड़ते हैं। ज़्यादातर पत्नियाँ अपने दिल की बात, किसी गार्डन में जाना हो, कोई मनपसंद फ़िल्म देखनी हो, पहले की तरह किसी ख़ास जगह पर घूमने जाना हो, अपनी भावनाएं ज़ाहिर करना हो, चाहे फ़िर प्यार का इज़हार ही क्यूँ न हो! करने से झिझकती हैं। तो वहीं कुछ पति भी अपनी पत्नी से अपनी भावनाएं, या टाइम स्पेंड करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। 

आपने यह गीत तो ज़रूर सुना होगा- "ना प्यार की सीमा हो, ना उम्र का हो बंधन..!" लेकिन अधिकांश कपल्स कुछ ही सालों बाद नीरसता भरा जीवन जीने की आदत बना लेते हैं। दरसअल वे गृहस्थी में पड़ने के बाद अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्तता का बहाना मारते रहते हैं। उनके बीच प्यार भरी चुटकियां, हल्का फुल्का रोमांस भी ख़त्म हो चुका होता है। 

मिलाजुला परिणाम यह होता है कि दोनों चाहते हुए भी एक-दूसरे के बीच संतोषजनक रिश्ता नहीं रख पाते। एक अधूरापन हमेशा ही बना रहता है। जो कि उनके जीवन के लिए बहुत ख़तरनाक साबित हो सकता है। ज़रा सोचकर देखिये कि अगर दोनों ही अपने बीच की झिझक दूर कर लें। तो ज़िंदगी कितनी आसान हो जाएगी। यही Misunderstanding ही तो पति-पत्नी के बीच अलगाव का कारण बन जाया करती है।


(2) एक दुसरे की भावनाओं का रखें ख़याल-



पति-पत्नी को एक दूसरे की भावनाओं का ख़याल रखना चाहिए। ये सुनने या पढ़ने में शायद महत्वपूर्ण न लगे। मगर आपसी रिश्तों में यदि भावनाओं की कद्र ना हो तो आपसी रिश्तों में दरार कब आ जाती है पता नहीं चलता। समस्या यही है कि पति-पत्नी इसी अहम बात को नज़रअंदाज़ करते रहते हैं। पति-पत्नी एक दूसरे की भावनाओं का ख़याल रखें तो उनके बीच का रिश्ता और भी मज़बूत बनता है। दोनों की पसंद, सोच, जीवनशैली आदि में कुछ अंतर तो होता ही है। इसीलिये एक दूसरे की भावनाओं को समझते हुए एक दुसरे का साथ देना चाहिए। ऐसा करने से कपल्स के बीच प्यार और भी गहरा होता चला जाता है। दोनों की पसंद एक हो जाने में फ़िर देर नहीं लगती। 


(3) एक दूसरे के रिश्तेदारों, संबंधियों का सम्मान करना-
अपने पार्टनर के दोस्तों या रिश्तेदारों को अवश्य ही सम्मान दें। यदि आप एक दूसरे के रिश्तेदारों, सगे संबंधियों का सम्मान करेंगे तो आपका एक दूसरे के प्रति सम्मान बढेगा। आप ताउम्र एक दूसरे से प्यार और सम्मान पाएंगे। और हाँ! यदि कोई दुश्चरित्र हो या आपके साथ व्यवहार सही न हो तो अपने पार्टनर से ज़रूर बता दें। ताकि बाद में आपको ऐसे लोगों की वजह से मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े। ऐसे मामलों में पति-पत्नी की आपसी समझ से समाधान निकाले जा सकते हैं। रामायण-महाभारत काल से लेकर आज के युग में भी देखा जाये तो पारिवारिक  समस्याएँ ज़्यादा बदली नहीं हैं। बदला है तो बस जीने की अदा और जामंजस्य करने का तरीक़ा। पति-पत्नी के अधिकारों की बात करें तो इनके अधिकारों को लेकर समाज और क़ानून में ज़रूर बदलाव आया है। मगर हम आपको बता दें कि पति-पत्नी के बीच के रिश्ते किसी क़ानून अथवा किसी दबाव से नहीं चला करते। ये रिश्ता तभी चल सकता है जब दोनों के बीच आपसी लगाव, सम्मान व समर्पण हो। 

(4) आपस में लड़ाई हो जाये तो कुछ समय बाद एक दूसरे को मनाने की कोशिश करना-


पति-पत्नी के बीच लड़ाई या नोकझोंक होना आम बात होती है। लेकिन अगर थोड़ी लड़ाई भी हो तो एक दूसरे को मनाने की कोशिश करना ये ख़ास बात होती है। आप जिससे प्यार करते हों उसके बिना रहना मुश्किल ही होता है। पति-पत्नी के बीच का प्यार भी ऐसा ही होना चाहिए। पति-पत्नी के बीच यदि गहरा प्यार है। तो लड़ाई के कुछ ही घंटों बाद उन्हें एक दूसरे के बिना रहना असंभव सा लगने लगता है। उन्हें अपनी ग़लती का एहसास स्वयमेव होने लगता है और वे एक दूसरे को मनाने की तरक़ीब भी सोचने लगते हैं। जिसका परिणाम यह होता है कि ऐसे पति-पत्नी एक दूसरे से ज़्यादा दिनों तक नाराज़ रह ही नहीं सकते।

(5) एक दूसरे को वैसे ही पसंद करना, जैसे पहले करते थे-


कपल्स चाहे जैसे भी हों। शादी के बाद उनके शारीरिक डीलडौल में परिवर्तन तो आता ही है। कुछ कपल्स ख़ुद को फ़िट रखने का प्रयास करते हैं और वो इस प्रयास में सफ़ल भी होते हैं। लेकिन कुछ कपल्स कोई प्रयास ही नहीं करते। लेकिन कुछ कपल्स की ख़ासियत यह होती है कि वे भले ही शारीरिक रूप से बदल गए हो। एक दूसरे को उसी रूप में पसंद करते है। हम आपको बता दें कि ऐसा तभी होता है जब कपल्स एक दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते हों और एक दूसरे का ख़याल शादी के कुछ सालों बाद भी उसी तरह करते हों। जैसे पहले करते थे।

पति-पत्नी को ये बात हमेशा याद रखना चाहिए कि ये छोटी-छोटी बातें, आपसी रिश्ते पर भारी पड़ती हैं। अक्सर कपल्स इन बातों को इग्नोर करते रहते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि उनका पार्टनर ख़ुद ही care करेगा। ये काम उसका है। दोस्तों पति हो या पत्नी। अगर आप अपने साथी का ख़याल रखते हैं तो इसका प्रभाव सीधे आपके साथी के दिल पर उतरता है।


(6) हर चीज़ में छोटी-छोटी ख़ुशियाँ ढूंढना-



दोस्तों जीवन में सुख-दुःख, उतार-चढ़ाव तो आते जाते रहते हैं। कुछ कपल्स शादी के कुछ सालों बाद यही सोचकर नर्वस होकर जीते हैं कि अब तो वे पुराने हो गए हैं, उन्हें तो सीनियर कपल्स की तरह रहना चाहिए। अब तो वे माता-पिता बन चुके हैं। अब उन्हें पहले की तरह Behave करना शोभा नहीं देता, वगैरह वगैरह। 

लेकिन वहीं कुछ कपल्स बड़ी ही जिंदादिली से जीते हैं। एक दूसरे को उतनी ही गर्मजोशी से प्यार का इज़हार करते हैं। दोस्ती और प्यार का रिश्ता उतने ही गर्मजोशी से निभाते हैं। वे आपस में प्यार के बंधन में इतने गहरे जुड़े होते हैं कि उनके पास किसी और टेंशन के लिए टाइम ही नहीं बचता। दोस्तों यही कला होती है समझदार कपल्स की जीवनशैली में। वे एक दूसरे के साथ टाइम स्पेंड करते-करते ही अपनी छोटी सी दुनिया में छोटी-छोटी खुशियां ढूंढ लेते हैं।


(7) रिश्ते में संतुलन बनाए रखना-

पति-पत्नी के बीच प्यार हो, तो रिश्तों में संतुलन भी बना रहता है। ये कला पति-पत्नी से बेहतर कोई नहीं जान सकता। यदि आप भी विवाहित हैं तो ये कला आपको भी आनी चाहिए। पति-पत्नी के बीच का रिश्ता कच्ची डोर की तरह होता है। मगर उनके बीच यदि प्यार गहरा हो, तो उनकी ये डोर कोई भी कमज़ोर नहीं कर सकता। अक़्सर देखा जाता है कि उनके आसपास ऐसे अनेक कारण बनते हैं जिनके चलते उनके बीच तालमेल गड़बड़ होने का ख़तरा बना रहता है।


लेकिन एक दूसरे के साथ सच्चे प्रेम में बंधे कपल्स कितनी भी परेशानियों के बावजूद क़दम से क़दम मिलाकर साथ चलने में सफल हो जाते हैं। दोस्तों ऐसे कपल्स के बीच का रिश्ता मज़बूत बनकर दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन जाता है। पति-पत्नी के बीच रिश्ता कैसा हो! इस तरह के कपल्स से सीखा जा सकता है।


(8) एक दूसरे के साथ अच्छे से पेश आना-


दोस्तों! पति-पत्नी के बीच का रिश्ता ऐसा होना चाहिए कि वो अगर एक दूसरे से उलझ जाएं तब भी एक दुसरे के साथ अच्छे से पेश आना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब सुलह हो तब मन में किसी प्रकार की टीस न रहे। वरना लंबे समय तक उनके बीच रिश्तों में खटास बनी रहती है। जिसका परिणाम उन दोनों के बीच के रिश्ते के लिए घातक साबित हो सकता है।

अक़्सर यही देखा जाता है कि कपल्स आपस में झगड़ा करते समय एक दूसरे के साथ बहुत ही बुरी तरह पेश आते हैं। वे भूल जाते हैं कि आख़िर उन्हें ही साथ रहना है। वे एक दूसरे से उलझने के बाद अपनी मर्यादाएं व सारी सीमाएँ लॉघ चुके होते हैं। कुछ कपल्स तो दूसरों के सामने अपने साथी के आत्मसम्मान का ध्यान न रखते हुए उसे दूसरों के सामने ज़लील करने से भी बाज़ नहीं आते।


(9) एक दूसरे पर भरोसा करना-


पति-पत्नी के रिश्तों के बीच सबसे अहम बात होती है एक दूसरे पर भरोसा करना। उनके बीच विश्वास की डोर जितनी मज़बूत होगी उनका प्यार उतना ही सशक्त होगा। क्योंकि विवाह के बाद एक नया जीवन शुरू होता है। दो ऐसे लोग शादी के बंधन में बंधते हैं जो एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं जानते। उनके विचार, शौक, रहन-सहन, खानपान आदि के साथ-साथ रिश्तों के प्रति क्या विचारधारा है यह जानने के लिए भी वक्त लगता है। ऐसे में उनके बीच कुछ मतभेद लाज़मी हो जाते हैं। अलग-अलग लोगों में उनके प्रति अलग-अलग विचार भी लाज़मी होते हैं। ऐसे नाज़ुक घड़ी में पति-पत्नी के बीच विश्वास ही उनके रिश्ते को संभाले रखने के लिए आवश्यक होता है।

(10) पुरानी बातों को भुला देना-



अक्सर पति-पत्नी के बीच जब भी लड़ाई होती है तब वे एक दूसरे के सामने पुरानी बातों को याद करते हुए बखेड़ा खड़ा कर देते हैं। आप तो जानते ही हैं कि पुरानी बातें याद करने से दोनों के बीच सुलह का रास्ता बनने के बजाय, लड़ाई और भी ज़्यादा गहराने लगती है। अच्छे कपल्स की पहचान यही है कि वे नोकझोंक या आपसी झगड़ों के बीच पुरानी बातों को ताज़ा न करें। बल्कि ऐसी बातें जिन्हें याद करने से आपसी कलह बढ़ती हो। उन्हें भुला देने में ही समझदारी समझें। ऐसा करना उन दोनों के रिश्तों के साथ-साथ पूरे परिवार के लिए भी बेहतर साबित होता है।

(11) पार्टनर से अपनी परेशानी को साझा करना-


दोस्तों आपको हम बता दें कि पति-पत्नी का रिश्ता सिर्फ़ सुख में साथ रहने के लिए ही नहीं बल्कि दुःख में भी साथ देने के लिए होता है। फ़िर भी कई कपल्स किसी परेशानी में होते हैं तब ख़ुद को अकेले रखना ज़्यादा पसंद करते हैं। जबकि ऐसा करना ठीक नहीं। अगर अपनी परेशानी अपने पार्टनर से साझा की जाए। तो दोनों मिलकर इस समस्या से जूझने का प्रयास करेंगे। जिसका फ़ायदा यह होगा कि एक दूसरे का ख़याल रखते हुए दोनों के बीच का रिश्ता और भी मज़बूत होगा। दोनों के बीच अपनेपन की भावना जागृत होने लगेगी जो कि उनके लिए फ़ायदेमंद साबित होगी।


(12) एक दूसरे के लिए समय निकालकर कहीं घूमने फिरने जाएं-


पति-पत्नी विवाह के बाद अपनी ज़िंदगी में इतने व्यस्त हो जाते हैं। उन्हें याद ही नहीं रहता कि उनके लिए घूमना फिरना भी ज़रूरी है। दरअसल आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में इतने ज़्यादा तनाव होते हैं कि इन झमेलों के बीच कपल्स एक दूसरे के लिए पूरे दिल से समय देना ही भूल जाते हैं। परिणाम यह होता है कि उनके बीच का रिश्ता कुछ सालों बाद नीरसता से भरा लगने लगता है।

इसीलिए पति-पत्नी को चाहिए कि वे परिस्थिति के अनुसार या अपने सुविधा के अनुसार अपने साथी के लिए स्पेशल टाइम निकालें। हो सके तो कहीं घूमने जाएं जहाँ वे दोनों कम से कम उतने समय तक एक दूसरे के साथ बिना किसी तनाव और डिस्टर्बेंस के, समय गुज़ार सकें। यक़ीन मानिए! ऐसा करने से आपके बीच का रिश्ता एक नई उमंग के साथ, नई ऊर्जा से परिपूर्ण होकर सशक्त होने लगेगा।



(13) प्रशंसा या माफ़ी मांगने में कंजूसी न करना



एक दूसरे के साथ सात जन्मों तक रहने के लिए जब कसमें खा ही ली है तो फ़िर तारीफ़ करने अथवा माफ़ी मांगने में कंजूसी कैसी! पति-पत्नी के बीच का रिश्ता ऐसा ही होना चाहिए। तारीफ़ करना हो तो पूरे दिल से। किसी बात पर नोकझोंक हो जाये तो पूरे दिल से माफ़ी माँग लेना चाहिए। पति-पत्नी के बीच कितनी भी लड़ाई हो जाये। अगर दोनों एक दुसरे से माफ़ी मांगने में कंजूस ना हों तो उनके बीच सुलह भी उतनी ही जल्दी हो जाया करती है। 

दरअसल पति-पत्नी के बीच अत्यधिक अलगाव के कारणों में से एक कारण यह भी है कि सुलह के समय दोनों के इगो टकराने लगते हैं। कभी-कभी ये प्रॉब्लम इतनी भयावह रूप ले लेती है कि कपल्स कई दिनों, कई महीनों, बल्कि कभी -कभी तो सालों तक मनमुटाव बनाये रखते हैं। कोई भी आगे बढ़कर बात नहीं करना चाहता। 

परिणामस्वरूप यही ईगो उनके बीच के रिश्ते के टूटने का प्रमुख कारण बन जाता है। जनाब! बात करने से ही बात बनती है! पति-पत्नी के बीच की समस्या को इन्हीं दोनों के अलावा कोई नहीं समझ सकता। इसीलिये कपल्स को अपनी समस्याओं का निराकरण आगे बढ़कर ख़ुद निकालना चाहिये।


(14) एक दूसरे से दूर जाने पर याद करना-


पति-पत्नी के बीच अगर अटूट प्यार हो तो यक़ीनन एक दूसरे से दूर जाने पर वे एक दूसरे को बहुत ज़्यादा याद करते हैं। रिश्ता अगर मज़बूत हो तो दूर रहते हुए उनके बीच छोटी-मोटी शिकायतें स्वतः ही ख़त्म हो जाती हैं। अक़्सर यही होता है कि अगर पति-पत्नी के बीच किसी बात पर अनबन चल रही हो। लेकिन यदि उनके बीच प्यार बरक़रार हो, तो दूर रहने पर सारी अनबन भूलकर वे एक दूसरे से मिलने के लिए आतुर रहते हैं। उन्हें एक दूसरे के बग़ैर कहीं भी रहने का मन नहीं करता। ऐसा होना पति- पत्नी के बीच अटूट रिश्ते की पहचान होती है।


(15) अच्छा बेड टाइम बिताना-


वैवाहिक जीवन को सहज और ख़ुशनुमा बनाये रखने के लिए एक प्रमुख वजह होती है। पति-पत्नी के बीच बेडरूम में बिताया जाने वाला क्वालिटी टाइम। क्योंकि बेडरूम ही एक ऐसा स्थान होता है जब आप पूरी तरह अकेले होते हैं जहाँ आप आपस में अपने विचार साझा करने, भविष्य की योजनाएँ, पूरे दिन का विश्लेषण व अपनी भावनाएं एक दुसरे से साझा करने के लिये स्वतंत्र होते हैं। बाक़ी वक्त में तो आप और आपके साथी को आपके परिवार के साथ वक्त बिताना और उनका ख़याल रखना होता है। जहाँ आप सबके विचारों के साथ तालमेल बनाये रखने का प्रयास करते रहते हैं।

पति-पत्नी को चाहिए कि बेडरूम में, तमाम बातों के अलावा, एकदूसरे के साथ प्यार भरी बातें, प्यार का इज़हार, अपनी भावनाओं को बेझिझक होकर एकदूसरे के सामने रखना चाहिये। कौन पहल करेगा! इस सवाल में न उलझकर ख़ुद पहल करें। क्योंकि इस वक्त को ख़ुशनुमा बनाने की ज़िम्मेदारी पति-पत्नी दोनों की होती है। पति-पत्नी के बीच का रिश्ता कैसा है? इस बात पर निर्भर करता है कि उनके बीच अंतरंग संबंध (physical relationship) कैसे हैं? 

पति-पत्नी के बीच अलगाव के लगभग 70% मामलों में रिश्तों में दरार की वजह उनके बीच अंतरंग संबंधों का ठीक न होना ही होता है। यह बात अलग है कि दोनों में से कोई भी इन समस्याओं पर बात नहीं करना चाहता। सच कहा जाए तो तक़रार की वजह यहीं से शुरू होती है जिसका प्रभाव आपके बाक़ी समय की एक्टिविटी पर पड़ता है। वे चिड़चिड़े होने लगते हैं। और बात-बात पर झगड़ने लगते हैं। जिस वजह से कोई छोटी सी समस्या भी उनके लिए आरपार की समस्या बन जाती है। 

आजकल पति-पत्नी के बीच की समस्याओं के समाधान के लिए परामर्श केंद्र (Counseling center) उपलब्ध होते हैं। जहाँ पुरुषों के लिए पुरुष विशेषज्ञ और महिलाओं के लिए महिला विशेषज्ञ, उनकी समस्याओं का समाधान खोजते हैं। समस्या से ग्रसित पति-पत्नी को परामर्श केंद्र से संपर्क करना चाहिए।

(16) एक दूसरे को श्रेय देना-


आप के रिश्ते में चार चाँद लग जाते हैं। यदि आप अपने पार्टनर के किसी अच्छे काम पर उसे श्रेय देना सीख जाते हैं। आपके साथ रहते हुए आपका साथी आपकी फ़िक्र करता है, हर छोटी-मोटी बातों का ख़याल रखता है। सुबहो-शाम पूरे दिल से आपके साथ और आपके परिवार के साथ पूरे दिल से रिश्ता निभाता है। उनका पूरा ख़याल रखता है। ऐसे में आपका उसे श्रेय देना आपके साथी के लिए ख़ास मायने रखता है। वह ऊर्जा से भरपूर हो जाता है और उसके दिल में आपके लिए प्यार गहरा होने लगता है। जो कि आपके रिश्ते में मज़बूती प्रदान करता है।

रिश्तों को ख़ुशहाल और मज़बूत करना बहुत आसान है। इसके लिए ज़रूरत है एक छोटी-सी पहल करने की। अगर आपके रिलेशन में ऊपर बताए गए अच्छे रिश्ते के संकेत नहीं दिखते हैं, तो इसे मज़बूत बनाने के लिए हमारे इस लेख "सुखी और अच्छे रिश्ते की 15 पहचान | पति पत्नी के बीच में कैसा रिश्ता होना चाहिए?" में दिए गए सभी टिप्स को अपना सकते हैं। पति-पत्नी के रिश्ते को जितनी समझदारी से संभाला जाएगा, वह उतना ही मज़बूत बनता चला जायेगा। अगर रिश्तों को लेकर नादानियां हो भी जाएं, तो उसे सुधारने और रिलेशन को मज़बूत करने की हमेशा ही कोशिश करनी चाहिए।

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