मुद्रा एक ऐसी वस्तु है जिसे विस्तृत रूप में विनिमय के माध्यम, मूल्य के मापक, ऋणों के अंतिम भुगतान तथा मूल्य के संचय के साधन के रूप में स्वतंत्र एवं सामान्य रूप से बिना किसी संदेह के स्वीकार किया जाता है।
मुद्रा को अंग्रेज़ी भाषा के शब्द 'Money' का एक रूपांतरण माना जाता है। यह लैटिन भा केषा के 'Moneta' से बना है। प्राचीन समय में एक समय रोम में 'देवी जूनो' के मदिर में मुद्रा निर्मित की जाती थी। इस देवी को ही मोनेटा कहा जाता था।
इसके अलावा मुद्रा को लैटिन भाषा में 'पैक्युनियां' भी कहा जाता था। जो कि 'पैकस शब्द से बना है। जिसका अर्थ है 'पशुधन'। दरअसल प्राचीन समय में पशुओं को भी मुद्रा के रूप में प्रयोग में किया जाता था। यह कहा जा सकता है कि प्राचीन समय से ही मुद्रा का प्रचलन रहा है।
मुद्रा का आविष्कार कैसे और कब हुआ? यह पता लगा पाना असंभव है। मगर इतना कहा जा सकता है कि मानव सभ्यता की मूलभूत ज़रुरतों में से मुद्रा भी एक ज़रूरी तत्व है। जिसका क्रमिक विकास, मानव सभ्यता के क्रमिक विकास के साथ-साथ होता चला आ रहा है।
मुद्रा का क्रमिक विकास कई अवस्थाओं में होता रहा है जैसे- पशु मुद्रा, वस्तु मुद्रा, धातु मुद्रा, कागज़ी मुद्रा, बैंक मुद्रा (साख मुद्रा), निकट मुद्रा, प्लास्टिक मुद्रा।
साधारण तौर पर हम मुद्रा के इस क्रमिक विकास को निम्न रूपों में जान सकते हैं -
सिक्के - धातु से बने छोटे छोटे मूल्य की मुद्रा,
नोट - कागज़ से बनी मुद्रा,
बैंक मुद्रा - चेक, ड्राफ्ट, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड
डिजिटल मुद्रा - UPI, मोबाइल वॉलेट, ऑनलाइन पेमेंट।
मुद्रा से आप क्या समझते हैं? | Money Meaning in Economics in Hindi
मुद्रा के मूल्य से अभिप्राय एक देश में वस्तुओं और सेवाओं को ख़रीदने की मुद्रा की शक्ति से है। अर्थात उपर्युक्त सभी परिभाषाओं के अनुसार यदि हम मुद्रा को परिभाषित करें।
तो हम कह सकते हैं कि, वह वस्तु जिसमें तीन विशेष गुण, (1) विनिमय का माध्यम, (2) मूल्य का मापन,
(3) संचय का आधार विद्यमान हों। मुद्रा कही जा सकती है।
अर्थात, "ऐसी वस्तु जो सर्वमान्य, सर्व स्वीकृत, सर्व ग्राह्यता प्राप्त हो तथा जिसे विनिमय माध्यम, मूल्य के मापन व संचय के कार्य हेतु प्रयोग में लाया जाता हो, मुद्रा कहलाती है।"
ऐसी वस्तु को, जिसे विनिमय के माध्यम, मूल्य के माप, क्रय शक्ति के संचय तथा भावी भुगतानों के मान के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिसे देश के समस्त नागरिकों के द्वारा स्वतंत्र, विस्तृत एवं सामान्य रूप से बिना किसी संदेह के स्वीकार किया जाता है। मुद्रा (mudra) कहा जाता है।
सामान्य शब्दों में कहा जाए तो मुद्रा (currency) धन के उस रूप को कहा जाता है जिसके द्वारा दैनिक जीवन में वस्तुओं और सेवाओं की ख़रीदी और बिक्री की जाती है। इसके अन्तर्गत सिक्के और काग़ज़ी नोट आते हैं। आमतौर पर किसी देश में प्रचलित मुद्रा उस देश की सरकार द्वारा बनाई गई एक व्यवस्था होती है। जो अनिवार्य रूप से स्वीकार की जाती है।
मुद्रा का विस्तार पूर्वक अध्ययन करने हेतु मुद्रा को निम्न दो भागों में बांटा जा सकता है -
(अ) प्रकृति के आधार पर (Nature based definition)
(ब) विस्तार के आधार पर (Scarcity based definition)
(अ) प्रकृति के आधार पर -
सामान्य स्वीकृति पर आधारित परिभाषाओं में कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई परिभाषाएं शामिल हैं जो कि निम्न हैं -
प्रो. हार्टले विदर्स के अनुसार - "मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करे।"
रॉबर्टसन के अनुसार- "मुद्रा एक ऐसी वस्तु है जिसे वस्तुओं की क़ीमत चुकाने तथा अन्य व्यावसायिक दायित्वों को निपटाने के लिए विस्तृत रूप से स्वीकार किया जाता है।"
मार्शल के अनुसार- मुद्रा के अंतर्गत वे सभी वस्तुएं शामिल की जाती हैं। जो किसी विशेष स्थान अथवा समय पर बिना किसी संदेह अथवा विशेष जांच के वस्तुओं एवं सेवाओं को ख़रीदने तथा व्यय करने के साधन के रूप में सामान्य रूप से स्वीकृत की जाती है।
एली के अनुसार- मुद्रा के अन्तर्गत उन सभी वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है। जिन वस्तुओं को समाज में सामान्य रूप।से स्वीकृत किया जा रहा हो।
(ब) विस्तार के आधार -
इस वर्ग के अन्तर्गत उन परिभाषाओं को शामिल किया जाता है। जो मुद्रा के क्षेत्र को या तो अत्यंत संकुचित या फ़िर विस्तृत कर देती है। कुछ परिभाषाएं ऐसी भी हैं जो मुद्रा के क्षेत्र को न तो संकुचित करती हैं और ना हि विस्तृत करती है। बल्कि मुद्रा के क्षेत्र को उचित स्थान प्रदान करती है। इस वर्ग में सम्मिलित परिभाषाओं को निम्न प्रकार प्रस्तुत किया गया है।
प्रो. मार्शल के अनुसार - "मुद्रा के अन्तर्गत उन सभी वस्तुओं का समावेश होता है। जिन्हें किसी समय या स्थान पर बिना किसी संदेह हेतु साधन के रूप में स्वीकार किया जाता है।"
प्रो. एली के अनुसार- "वह वस्तु मुद्रा कही जा सकती है जिसे विनिमय के माध्यम के रूप में हस्तांतरित किया जा सकता हो तथा ऋणों के अंतिम भुगतान हेतु सामान्य रूप से स्वीकृत किया जाता हो।"
उपर्युक्त सभी परिभाषाओं पर विचार करने के बाद यदि मुद्रा के लिए कोई एक उचित परिभाषा देनी हो। तो हम निम्न परिभाषा से मुद्रा (mudra) को परिभाषित कर सकते हैं -
मुद्रा की उचित परिभाषा - "ऐसी वस्तु निसंदेह मुद्रा कही जा सकती है जिसका उपयोग विस्तृत रूप में विनिमय के माध्यम, मूल्य के मापन, ऋणों के अंतिम भुगतान तथा मूल्य का संचय करने के लिए साधन के रूप में स्वतंत्र तथा सामान्य रूप से स्वीकार करते हुए किया जाता हो।
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