अंतर क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अंतर | Difference between inter regional trade and international trade in hindi
मानव सभ्यता के विकास के लिए व्यापार एक महत्वपूर्ण आधार है। साधारण तौर पर वस्तुओं एवं सेवाओं का आदान प्रदान ही व्यापार कहलाता है। जहां किसी एक देश के भीतर ही विभिन्न क्षेत्रों में किया जाने वाला व्यापार अंतर क्षेत्रीय व्यापार या आंतरिक व्यापार कहलाता है। किन्तु यदि वस्तुओं या सेवाओं का आदान प्रदान अलग-अलग देशों के बीच किया जाए तो उसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है।
प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों के अनुसार अंतर क्षेत्रीय व्यापार तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समान नहीं है। इनमें काफी अधिक असमानता पायी जाती है। उनके अनुसार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक पृथक सिद्धांत का प्रतिपादन करने की आवश्यकता है इसीलिए रिकाडों, मिल, स्मिथ आदि ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए पृथक सिद्धांत का निर्माण किया क्योंकि अंतक्षेत्रीय व्यापार तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अनेक असमानताएं देखो जाती हैं। इस अंक में हम अंतर क्षेत्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में क्या अंतर है? विस्तार से जानेंगे।
अंतर क्षेत्रीय व्यापार तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अंतर (Difference between Inter-regional trade and International trade in hindi)
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा अंतर क्षेत्रीय व्यापार में अंतर (antarrashtriya vyapar tatha antar kshetriya vyapar me antar) निम्न हैं -
1. श्रम तथा पूंजी की गतिशीलता में अंतर -
एक ही देश के विभिन्न क्षेत्रों में श्रम तथा पूंजी गतिशील होते हैं किंतु राष्ट्रों के बीच श्रम तथा पूंजी में इस प्रकार की गतिशीलता नहीं पायी जाती है। विभिन्न देशों में भाषा, रीति-रिवाज, धर्म, सामाजिक दशाओं की भिन्नता, स्थानीय लगाव तथा परिवहन व्यय की अधिकता के कारण श्रम की गतिशीलता कम होती है। इसी प्रकार अधिक जोख़िम, पूंजी की असुरक्षा एवं निरीक्षण में कठिनाई के कारण विनियोक्ता अपनी पूंजी को विदेशों में विनियोजित नहीं करना चाहते हैं इससे पूंजी की गतिशीलता में कमी आती है।
2. प्राकृतिक साधन तथा भौगोलिक स्थिति में अंतर -
अलग अलग देशों में अलग अलग प्रकार के प्राकृतिक संसाधन तथा भिन्न भिन्न भौगोलिक स्थितियां पायी जाती हैं जिसके कारण प्रादेशिक श्रम विभाजन तथा उद्योगों का स्थानीयकरण संभव होता है और इनसे प्राप्त होने वाले लाभ को अलग अलग देशों की ओर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है।
3. उत्पादन की दशाओं में अंतर -
सभी देशों में उत्पादन संबंधी सुविधाएं अलग-अलग होती हैं क्योंकि विभिन्न देशों की कर-प्रणाली, औद्योगिक व्यवस्था. सामाजिक सुरक्षा का प्रबंध, शिक्षा सुविधाएं, श्रम संघ तथा औद्योगिक गुटबंदी व नियम अलग-अलग होते हैं। इस कारण विभिन्न देशों में उत्पादन लागतों में अंतर आ जाता है। इसके विपरीत एक देश के अंदर वस्तुओं के उत्पादन की दशाएं लगभग एक सी होती हैं, जिस कारण उत्पादन लागत में समानता पायी जाती है।
4. बाज़ारों की प्रथकता -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार राजनैतिक तथा औद्योगिक घटकों को बाज़ारों से पृथक कर देते हैं। आर्थिक संसाधनों के स्थानांतरण में प्रतिबंध उपभोक्ताओं की रुचि, आदत तथा प्रथाओं में अंतर देशी बाज़ार को विदेशी बाज़ार से पृथक करते हैं। इन्हीं अंतरों के कारण सामान्य सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में लागू नहीं होता है।
5. परिवहन व्यय में अंतर -
एक ही देश के अंदर, माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए परिवहन के साधन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, तथा इसमें परिवहन व्यय भी कम होता है। इसके विपरीत विदेशों में माल भेजने के लिए परिवहन साधन सरलता से उपलब्ध नहीं होते हैं और परिवहन व्यय आंतरिक व्यापार की तुलना में ज़्यादा महंगे होते हैं।
6. मौद्रिक प्रणाली में अंतर -
एक देश की सीमा के अंतर्गत एक ही मुद्रा का प्रचलन होने के कारण आंतरिक भुगतान में किसी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती है। जबकि विभिन्न देशों में विभिन्न प्रकार की मुद्राएं प्रचलित होती हैं जिससे विदेशी विनिमय संबंधी अनेक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
7. वस्तुओं के आयात-निर्यात में बाधा -
आंतरिक व्यापार में स्वतंत्र प्रतियोगिता पायी जाती है। अर्थात एक देश के भीतर व्यापार स्वतंत्रतापूर्वक किया जाता है। वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आने-जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है लेकिन भिन्न भिन्न देशों के बीच वस्तुओं के आने-जाने पर अनेक प्रतिबंध होते हैं जिस कारण विदेशी व्यापार की स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में विभिन्न बाज़ारों में स्वतंत्र प्रतियोगिता नहीं होने के कारण मूल्यों में काफी अंतर पाया जाता है।
8. वर्ग भिन्नता -
अंतक्षेत्रीय व्यापार एक ही वर्ग के विभिन्न क्षेत्रों में निवास करने वाले व्यक्तियों के मध्य होता है जबकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विभिन्न राष्ट्रों में रहने वाले व्यक्तियों के विभिन्न वर्गों के बीच होता है। लिस्ट के शब्दों में, "आंतरिक व्यापार हमारे बीच और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार हमारे और विदेशों के बीच होता है।"
9. भिन्न राष्ट्रीय नीतियां एवं हस्तक्षेप -
एक देश के आंतरिक व्यापार, उद्योग, वाणिज्य, मजदूरी, कीमत बीमा और करारोपण संबंधी कानून एवं नीतियां समान रहती हैं, किंतु विभिन्न देशों के बीच ऐसी व्यापारिक नीतियों एवं क़ानूनों में काफी भेद होता है। एक देश की आंतरिक सरकार तटकर नीति, अभ्यंश प्रणाली और विनिमय आदि नीतियों को निर्धारित करके हस्तक्षेप करती है। इसी आधार पर अंतर्राष्ट्रीय एवं अंतक्षेत्रीय व्यापार के मध्य भिन्नता पायी जाती है।
10. जीवन स्तर में भिन्नता -
आंतरिक व्यापार के अंतर्गत ऐसे उत्पादकों के बीच वस्तुओं का विनिमय किया जाता है जिनके स्तर में समानता होती है जबकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में ऐसे उत्पादकों के बीच वस्तुओं का विनिमय किया जाता है जिनके जीवन स्तर में भिन्नता होती है। आंतरिक व्यापार विश्लेषण इस मान्यता पर आधारित है। कि एक समान कार्य करने वाले लोगों में समान जीवन स्तर की प्रवृत्ति होती है जबकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में ऐसी कोई मान्यता नहीं होती है।
11. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की कुछ विशिष्ट समस्याएं-
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की कुछ विशिष्ट समस्याएं होती हैं जैसे अंतर्राष्ट्रीय तरलता की समस्या, अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग की समस्या, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे यूरोपियन साझा बाजार आदि का जन्म, अंतर्राष्ट्रीय पूंजी का आवागमन इत्यादि। आंतरिक व्यापार में ऐसी कोई समस्या पैदा नहीं होती है।
12. व्यापार एवं विनिमय नियंत्रण -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं व सेवाओं के आवागमन पर पर्याप्त नियंत्रण रखा जाता है। ये नियंत्रण आर्थिक दृष्टि से आवश्यक भी होते हैं लेकिन आंतरिक व्यापार में वस्तुओं व सेवाओं के आवागमन पर किसी प्रकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है।
13. विभिन्न सुविधाओं में अंतर -
एक देश के उत्पादकों को वहां की सरकार समान सुविधाएं प्रदान करती हैं परंतु विभिन्न देशों के उत्पादकों को समान सुविधाएं प्राप्त नहीं होती है उन्हें भिन्न-भिन्न सरकारों से भिन्न सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
14. अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग की समस्या -
एक समान मुद्रा प्रणाली होने के कारण आंतरिक व्यापार में मौद्रिक सहयोग की कोई समस्या नहीं होती है किंतु विभिन्न राष्ट्रों में भिन्न-भिन्न मौद्रिक प्रणाली होने के कारण मौद्रिक सहयोग की समस्या होती है।
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