हट्टा की ऐतिहासिक बावड़ी | जानिए क्या है हट्टा की बावड़ी का रहस्य व इतिहास?

दोस्तों भारत में प्राचीन काल से ही अनेक ऐसे दिलचस्प स्मारक, महल, बावलियाँ, मकबरे आदि हैं जिन्हें देखकर प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का बोध होता है। जिनकी कलाकृति, शिल्पकारी आदि देखकर आपका मन प्रसन्नता से खिल उठता है। साथ ही गौरवान्वित महसूस करने लगता है ऐसी बेजोड़ धरोहरों को देखकर। दोस्तों! इन्ही बेहतरीन धरोहरों में से एक है हट्टा की बावड़ी (Hatta ki bawdi)

हट्टा की बावली, बालाघाट


आज हम आपको मध्यप्रदेश के बालाघाट ज़िले में स्थित हट्टा की ऐतिहासिक बावली (Hatta ki bawli) के बारे में विस्तार से बताएँगे। दोस्तों हमारे साथ अंत तक बने रहिये। यक़ीनन आप इस ऐतिहासिक बावली के इतिहास व रहस्यों को जानकर रोमांचित महसूस करेंगे। तो चलिए इस आर्टिकल को आगे बढ़ाते हुए हम आपको विस्तृत जानकारी देते हैं। 

हट्टा की बावड़ी का लोकेशन (Location of hatta's stepwell)-

हट्टा की ऐतिहासिक बावली (Hatta ki bawli) हट्टा नामक ग्राम (गांव) में स्थित है जो कि मध्यप्रदेश के बालाघाट ज़िले में है। हट्टा की बावली, बालाघाट से लगभग 22 km की दूरी पर है। गोंदिया (महाराष्ट्र) से यह लगभग 37 km और नागपुर से लगभग 172 km की दूरी पर है।

हट्टा एक गांव है जो कि मध्यप्रदेश के बालाघाट ज़िले में है। यह बालाघाट से करीब 15 km पर स्थित है। जब आप बालाघाट से गोंदिया व्हाया रजेगांव बस मार्ग से जाते हैं तो आपको हट्टा के लिए रजेगांव के पहले सालेटेका से मुड़ना होता है। आप गोंदिया या बालाघाट से बाइक/कार से भी जा सकते हैं।


हट्टा की बावड़ी का इतिहास (history of hatta's stepwell in hindi)

जी हां!! अगर हम हट्टा की इस ऐतिहासिक बावड़ी के इतिहास की बात करें। तो यह हट्टा की बावड़ी काफ़ी प्राचीन धरोहर मानी जाती है। यह वास्तव में सैनिकों की बैरक है। ऐसा माना जाता है कि इस भूमिगत बावड़ी का निर्माण सैनिकों को छिपाने और विश्राम करने के लिए किया गया था।
 


जानकारी मिलती है कि यहाँ हैहय वंशीय राजाओं का साम्राज्य था। बाद में गोंड राजाओं ने अपना साम्राज्य स्थापित किया। बाद में यह हिस्सा गोंड राजाओं से होकर मेरठ के शासक भोसले के साम्राज्य में शामिल हो गया। 

अगर हट्टा की बावली की जानकारी की बात हो तो हम आपको बता दें कि हैहय वंशीय राजाओं के बाद गोंड वंशीय राजा हटे सिंह वल्के ने इस बावली का निर्माण कराया था। माना जाता है कि हटे सिंह वल्के के राजा होने की वजह से इस गाँव का नाम हट्टा रखा गया है। राजा हटे सिंह ने गर्मी के दिनों में सैनिकों के छिपने, पेयजल स्नान और आराम करने के लिए ही इस भूमिगत बावली का निर्माण कराया था।

गोंड काल के बाद मराठा शासक और भोसले साम्राज्य में भी इसका उपयोग होता रहा है। इस वजह से बावली में मराठा शासक और भोसले साम्राज्य की कलाकृतियाँ देखने मिलती हैं।

बावली में सैनिकों के नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां भी बनाई गई थीं। वैसे इन सीढ़ियों से होते हुए आप प्रथम तल से द्वितीय तक ही जा सकते हैं। द्वितीय तल के नीचे पानी भरा हुआ है। दरअसल पानी भरा होने की वजह से यह पता नही चल पाता कि सीढियां और भी नीचे कहाँ तक गयी हैं।

बावली में ही एक और छोटी सी गुप्त सीढ़ी है। जिससे एक व्यक्ति ही जा सकता है। बावली के पास सैनिकों को पानी पीने के लिए एक कुँआ भी है। आइये जानते हैं इस ऐतिहासिक बावली के निर्माण सी जुड़ी और भी कुछ विशिष्ट जानकारियाँ।


बावली का निर्माण किसने और कब बनवाया (who built the Step-well of hatta in hindi)

हट्टा की बावड़ी का इतिहास


पुरातात्विक विभाग द्वारा लगायी गयी पट्टी के अनुसार ज्ञात स्रोतों से पता चलता है कि बावली (बावड़ी) का निर्माण 17वीं-18वीं शताब्दी के दौरान चट्टानों को काटकर किया गया था। पत्थरों/चट्टानों को जोड़कर बनाई गई यह बावली आज भी मज़बूती के साथ खड़ी है। जिसका प्रमाण आप यहाँ आकर स्वयं देख सकते हैं। बताया जाता है कि इसके निर्माण के समय इसकी दीवारों की जुड़ाई चुना, बेल और गुड़ को मिलाकर की गई थी। जो कि मज़बूती की बेजोड़ गवाही ये ऐतिहासिक बावड़ी आज भी दे रही है।

प्रथम तल पर 10 स्तंभ तथा इसके नीचे 8 स्तंभ आधारित बरामदे एवं कक्ष का निर्माण किया गया है। बावड़ी के प्रवेशद्वार पर 2 चतुर्भुजी शिव अम्बिका प्रतिमाओं की नक्काशी की गई है। बावड़ी के स्तंभों में हैहय वंशीय, गोंड वंशीय और मराठा शिल्पकला के दर्शन होते हैं।


क्या था हट्टा की बावली के निर्माण का उद्देश्य-

इस बावड़ी का निर्माण प्राचीन समय में अनेक उद्देश्यों के लिए किया गया था। बताया जाता है कि उस समय इस बावली का इस्तेमाल राजा-रानी और उनके सैनिकों के विश्राम करने, नहाने और मनोरंजन के लिए किया जाता था। राजाओं की सेनाएँ अनेक जगहों से आकर यहाँ ठहरा करती थीं। जहाँ वह पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती थीं।

जितने प्रमाण यहाँ देखने मिलते हैं। उनसे यह भी प्रतीत होता है कि बावली के अंदर यानी कि ज़मीन के नीचे गर्मी बहुत ज़्यादा होती होगी इसीलिये राजा ने इस भूमिगत बावड़ी में पर्याप्त पानी जैसे कि पेयजल, स्नानागार की व्यवस्था कराई। हमेशा पानी भरे रहने की वजह से बावली के अंदर गर्मी के दिनों में भी ठंडक महसूस होती रही होगी।


हट्टा की बावड़ी के रहस्य (Secrets of Hatta's stepwell in hindi)

हट्टा की बावली का रहस्य

बावड़ी के रहस्यों की बात करें तो ऐसा लगता है कि इस हट्टा की बावली के निर्माण के पीछे अनेक रहस्य छिपे हुए थे। इस बावड़ी के रहस्यमयी प्रतीत होने की वजह हैं इसमें बनी रहस्यमयी सुरंगें। ऐसा बताया जाता है कि इन सुरंगों के ज़रिये लाँजी के ऐतिहासिक किले तक पहुँचा जा सकता है। 

इतना ही नहीं बल्कि इन सुरंगों के अंदर से ही कई ऐसे गुप्त रास्ते हैं जिन रास्तों से होकर महाराष्ट्र के नागपुर और मंडला में स्थित ऐतिहासिक किलों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। हालांकि आज के समय में इसके बंद होने की जानकारी मिलती है। फ़िलहाल इस बावली को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित कर अपने अधीनस्थ कर ली है।
 
इसका एक रहस्य यह भी है कि इस बहुमंज़िला बावड़ी में कई सालों से पानी का स्तर दो मंज़िल से नीचे नहीं उतरा है। जिस कारण इस बावड़ी का सही आकार लोगों के सामने अभी तक नहीं आ पाया है। बावड़ी के अंदर दो मंज़िल के नीचे डबाडब भरे पानी को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह बहुमंज़िला बावड़ी नीचे पाताल तक जा पहुँची हो। चाहे अकाल ही क्यों न पड़ जाए लेकिन इस बावड़ी का पानी हमेशा असीमित ही रहता है। यह रहस्यमय बावड़ी हमेशा पानी से भरी रहती है।

लेकिन इतना तो समझ आता है कि इस बावड़ी का उपयोग केवल स्नानागार, आराम और मनोरंजन के लिए ही नहीं बनाया गया था। बल्कि राजा इस बावड़ी का इस्तेमाल गुप्त अड्डे के रूप में करते थे। यहाँ गुप्त रूप से अनेक योजनाएँ बनायी जाती थीं। यही कारण है कि इस बावड़ी का ऐतिहासिक महत्त्व और भी बढ़ जाता है।  

हट्टा की बावली से जुड़ी मान्यताएं (Beliefs related to Hatta's stepwell in hindi)

दोस्तों गुज़रे दौर की कुछ कहानियाँ और मान्यतायें हर ऐतिहासिक धरोहरों के साथ जुड़ी होती हैं। इसी तरह हट्टा की बावली के रहस्यों के साथ-साथ कुछ कहानियाँ और मान्यतायें भी इस बावड़ी से जुड़ी हुई हैं। चलिए जानते हैं ऐसी ही कुछ मान्यतायें जो हट्टा की बावली से जुड़ी हुई हैं-

(1) बावड़ी के अंदर ही एक गुप्त कक्ष है जिसे लोग चोर कक्ष भी कहते हैं। दोस्तों इस चोर कक्ष से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी यह है कि पुराने समय में एक चोर इस गुप्त कक्ष में आकर अपने परिवार के साथ रहा करता था। दरअसल वह चोरी करता था और वापस बावड़ी में आकर छिप जाया करता था। यह गुप्त कक्ष, उस चोर के लिए लोगों से गुप्त रूप से छिपकर रहने में कई दिनों तक मददग़ार साबित भी हुआ।

लेकिन कुछ दिनों बाद चोर की पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया। जब बच्चा रोने लगा तब लोगों को उस बच्चे की आवाज़ की वजह से गुप्त कक्ष में इस परिवार के रहने की जानकारी हुई। तभी से इस गुप्त कक्ष को चोर कक्ष या चोर खोली के नाम से जाना जाता हैं।

(2) दोस्तों पानी से भरी बावड़ी की गहराई इतनी है कि इसको नाप पाना तक़रीबन नामुमकिन सा हो गया है। ऐसा माना जाता है कि पानी से भरी इसी गहराई में एक दिव्य मछली रहती है। जो कि कभी-कभी दिखाई देती है। इससे जुड़ी एक मान्यता है कि यह दिव्य मछली क़िस्मत वालों को दिखाई देती है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिव्य मछली की नाक में सोने की नथ जड़ी हुई है। इस मछली को लोग देव रूपी मछली कहते हैं जिसे देखना यानि अपनी क़िस्मत बन जाना मानते हैं।

हट्टा की बावली कैसे पहुँच सकते हैं (How to reach step-well of hatta in hindi)-

हट्टा यानि कि हट्टा की बावली (hatta ki bawli) /बालाघाट की बावली तक पहुँचने के प्रमुख रास्ते निम्न हैं -

(1) हवाई मार्ग (Airway)
निकटतम हवाई अड्डा- डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नागपुर, महाराष्ट्र। आप चाहें तो डॉ. बाबासाहेब अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नागपुर तक हवाई यात्रा करने के पश्चात नागपुर से बालाघाट या गोंदिया के लिए बस या ट्रेन पकड़ सकते हैं। जहाँ से आप सीधे हट्टा के लिए आसानी से जा सकते हैं।

(2) रेल मार्ग (Railway route)
गोंदिया जंक्शन और बालाघाट जंक्शन के बीच में हट्टा रोड रेल्वे स्टेशन है। जो कि बावली से सिर्फ 9 km की दूरी पर है। जबकि बालाघाट जंक्शन और गोंदिया जंक्शन अन्य नज़दीकी और आसानी से उपलब्ध रेलवे स्टेशन हैं। आप गोंदिया या बालाघाट रेलवे स्टेशन से हट्टा रोड रेलवे स्टेशन के लिए लोकल ट्रेन से आसानी से पहुँच सकते हैं।

(3) सड़क पहुँच मार्ग (Roadway)
चूँकि हट्टा गांव गोंदिया और बालाघाट दोनों ही शहरों के बीच में स्थित है इसीलिए आप किसी भी सरकारी या प्राइवेट बस स्टैंड से गोंदिया-बालाघाट चलने वाली बस से सालेटेका बस स्टैंड पर उतर सकते हैं। जहाँ से आपको हट्टा जाने वाली वाली लोकल बसें या और भी अन्य साधन मिल सकते हैं। क्योंकि हट्टा, सालेटेका से हट्टा सिर्फ 7 km की दूरी पर स्थित है।

गोंदिया बालाघाट रोड (SH-11) पर सालेटेका बस स्टेंड जहाँ से हट्टा गांव के लिए प्रवेश किया जा सकता है। सालेटेका बस स्टेंड पर उतरें और हट्टा जाने वाली दूसरी बस पकड़ें। सालेटेका से आपको हट्टा महज़ 7 km की दूरी पर मिलेगा। दूसरा तरीका यह है कि गोंदिया से बालाघाट की तरफ़ जाने वाली लोकल ट्रेन पर बैठकर हट्टा रोड रेलवे स्टेशन तक जा सकते हैं और वहाँ उतरकर हट्टा जाने वाली बस से जा सकते हैं।


हट्टा की बावड़ी के संरक्षण में क्या किये जा रहे हैं प्रयास?


हट्टा की बावली का प्रवेश द्वार


पुरातत्व विभाग द्वारा इस बावली को संरक्षित धरोहर मान लिया गया है। शासन ने इस ऐतिहासिक धरोहर को किसी भी तरह का नुकसान पहुँचाने पर जुर्माने का प्रावधान भी किया है। पहले यह बावली हट्टा के ज़मीदार के अधीन थी। इसके बाद पुरातत्व विभाग को सौंप दिया गया। तब से लेकर अभी तक यह पुरातत्व विभाग के अधीन है।

हट्टा की बावली पुरातात्विक धरोहर के अंन्तर्गत आने के बाद भी सरकार द्वारा इसके संरक्षण के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। जबकि इस बावड़ी में बेहद आकर्षित करती इन नक्काशियों और कलाकृतियों को देखने के लिए प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में यहाँ सैलानी पहुँचते रहते हैं। 

ऐसे में संरक्षण को लेकर सरकार की अनदेखी। सचमुच यह चिंता का विषय है। बालाघाट ज़िले की प्राचीन धरोहरों में से एक यह हट्टा की बावली अब देखरेख के अभाव में अपनी जर्जर अवस्था बयान करने लगी है। विशेष संरक्षण न हो पाने के कारण यहाँ गोंड कालीन नक्काशियां और दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ऐसा लगता है मानों यह ऐतिहासिक बावड़ी, अपनी लाचारी, अपनी ही भाषा में, पर्यटकों से कहने लगी है। 

भले ही सरकार ने इस प्राचीन ऐतिहासिक बावड़ी को संरक्षित धरोहर का नाम देे दिया है। लेकिन इसकी देखरेख और इसे सहेजने लिए अब तक के किये गए प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं।

आवश्यकता है इस प्राचीन धरोहर को सहेजकर रखने की। ताकि इस अद्भुत, अद्वितीय धरोहर से हम आने वाली पीढ़ी को भी परिचित करा सकें। सचमुच बालाघाट का इतिहास जब भी पढ़ा जाएगा। बालाघाट ज़िले की विशिष्ट धरोहरों में बालाघाट हट्टा की बावली (stepwell of hatta balaghat) का नाम अग्रणी होगा।

/किसी भी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहर के साथ, कई तरह के रहस्य और मान्यताएं  जुड़ी होती हैं। हमारा यह लेख किसी भी सच के होने न होने का पूर्ण दावा नहीं करता। हमने इस लेख में उन्हीं बातों, रहस्यों का उल्लेख किया है जो रिसर्च के दौरान पायी गयी हैं और जो कही या सुनी गई हैं.../

दोस्तों!! उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह आर्टिकल "हट्टा की ऐतिहासिक बावड़ी.." अवश्य पसंद आया होगा। हमने विशेष रुचि लेकर 'हट्टा की बावड़ी' पर जानकारी एकत्र कर आपसे साझा करने का प्रयास किया है। आपके ज़हन में अगर और भी कोई विशेष जानकारी हो तो आप अपने विचार comment box में साझा कर सकते हैं।

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