हाजी अली की दरग़ाह, जहाँ से कोई मायूस नहीं लौटता | Haji Ali Dargah ka rahasya

हाजी अली की दरग़ाह मुम्बई | Haji ali dargah ki story in hindi | Baba Haji Ali in hindi


हाजी अली की दरग़ाह, मुम्बई

दुनिया की सबसे रहस्यमयी और चमत्कारी जगहों में से एक है मुम्बई की हाजी अली दरग़ाह। दक्षिणी मुम्बई के वर्ली इलाके से लगभग 500 गज दूर अरब सागर में स्थित एक टापू पर एक पवित्र जगह है जिसे हाजी अली की दरग़ाह (haji ali ki dargah) के नाम से जाना जाता है। लगभग 4500 वर्ग मीटर में फैली यह अद्भुत और चमत्कारी दरग़ाह विश्व की उन चुनिंदा धार्मिक स्थलों में से एक है। जहाँ विश्व के सभी धर्मों के लोग एक साथ आकर आपसी भाईचारे के साथ इस हाजी अली की मज़ार (haji ali ki mazar) पर धागा बाँधने आते हैं।

दोस्तों जब इंसान की सारी कोशिशें नाक़ाम हो जाती हैं। उम्मीद के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। यहाँ तक कि धन-दौलत, दवा भी किसी काम नहीं आती। ऐसे में इंसान असहाय और डबडबाई आँखों से सिर्फ़ एक विश्वास लेकर उसकी चौखट पर पहुँचता है। जहाँ पर दुनिया के वो सारे असम्भव कार्य होते हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। सचमुच उस दरवाज़े से जब रहतम बरसती है तो भक्त अभिभूत होकर नतमस्तक हुए बिना नहीं रह पाते।



haji ali ki mazar


भक्तों को तब ईश्वर के सामर्थ्य की अनुभूति होती है। जब उनके जीवन में ऐसे चमत्कार होते हैं जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं कि होती है। तब उन्हें अद्भुत पॉवर का आभास होता है। आपने भी अपने जीवन में कभी न कभी इस तरह की अनुभूति महसूस की होगी। जब भी आपने ज़िन्दगी में किसी हताशा का सामना किया होगा।

दोस्तों एक अद्भुत शक्ति, जो इस तरह कार्य करती है उसे सुपर नैचरल पॉवर कहते हैं। दुनिया में हर धर्म से जुड़ी कुछ ख़ास जगहों पर इस तरह के नेचुरल पॉवर का एहसास होता है। उन्हीं में से एक है हाजी अली की दरग़ाह। जहाँ दुनिया भर के लोग अपनी मुरादें लेकर आते हैं। आज हम इसी अद्भुत और चमत्कारी हाजी अली दरग़ाह की जानकारी (haji ali dargah information in hindi) आपसे साझा करने वाले हैं।


हाजी अली की दरगाह का निर्माण | haji ali ki dargah ka nirman kab hua


haji ali ki dargah mumbai


अरब सागर में बने एक छोटे से टापू पर हाजी अली की दरग़ाह जो कि तट से लगभग 500 मी. की दूरी पर मुम्बई वर्ली क्षेत्र के पास में स्थित है। सचमुच यह इमारत भारतीय इस्लामी शैली की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।इसे 1431 में एक छोटे से टापू पर बनाया गया था। हाजी अली दरग़ाह में एक मस्जिद (मक़बरा) भी है जो कि सैय्यद पीर हाजी अली शाह बुखारी का स्मारक है। यह हाजी अली का मक़बरा और दरग़ाहशहर के केंद्र के पास, मुंबई के सबसे जाने माने धार्मिक व प्रसिद्ध स्थलों में से एक है।


हाजी अली दरग़ाह की वास्तुकला | Architecture of haji ali dargah in hindi



haji ali dargah

मस्जिद के भीतर हाजी अली का मक़बरा लाल और हरे रंग की चादर से ढककर सजाया गया है। और इनके आसपास चाँदी के डंडों से घेरा बनाया गया है। मुस्लिम परंपराओं के अनुसार महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रार्थना कक्ष उनके सम्मान के लिए यहाँ पर उपलब्ध कराए गए हैं।

सबसे ख़तरनाक और रोमांचक इस दरग़ाह तक जाने का रास्ता है। कांक्रीट से बने इस पुल के दोनों तरफ़ उठती समंदर की लहरें थपेड़े मारती रहती हैं। ज्वार आने के दौरान यह पुल पूरा का पूरा लहरों के अंदर समा जाता है। यानि कि दरग़ाह तक सुगमता से जाना या न जाना, ज्वार पर निर्भर करता है। बिना रेलिंग का रास्ता और रास्ते के दोनों तरफ समुंदर का पानी। सचमुच इस पुल से दरग़ाह तक का रास्ता तय करना, किसी रोमांच से कम नहीं होता।




हाजी अली दरग़ाह का रहस्य (haji ali dargah ka rahasya)

दोस्तों यह एक ऐसी दरग़ाह है जो तमाम रहस्यों से भरी हुई है। आप सभी जानते हैं कि समुद्र में चलने वाली लहरें जब विशालकाय तूफ़ान के साथ उठती हैं तो उसके सामने सब कुछ बौना और लाचार नज़र आता है। और ये चंद मिनटों में ही बड़ी से बड़ी इमारतों को धराशायी कर देती है। लेकिन आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि हज़ारों सालों से बनी इस दरग़ाह को अब तक किसी भी समुद्री तूफ़ान ने कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया। 


haji ali ki dargah ki photo


एक रहस्मयी सवाल तमाम लोगों के दिलोदिमाग़ पर हमेशा उमड़ता रहता है कि हाजी अली की दरग़ाह क्यों नहीं डूबती? दोस्तों इस लेख के अंत तक बने रहिये, इस लेख में हम इस रहस्य से पर्दा उठाने का पूरा प्रयास करने वाले हैं। हाजी अली दरग़ाह का सच क्या है? जानने के लिए इस लेख के अंत तक ज़रूर बने रहिएगा।




बारिश के दिनों में समुद्र के पानी से जहाँ आधा मुम्बई अस्त व्यस्त हो जाता है। लेकिन इस पानी में इतनी हिम्मत नहीं कि वह इस दरग़ाह की चौखट तक भी पहुँच जाए। आइये इस रहस्य को जानने के लिए हाजी अली दरग़ाह की कहानी पर नज़र डालते हैं। जहाँ आपको हाजी अली की कहानी (what is the story behind haji ali in hindi) बारीक़ी से जानने मिलेगी।


हाजी अली कौन थे? | हाजी अली की कहानी | Story of haji ali in hindi


हाजी अली का मक़बरा

दोस्तों सारी दुनिया जिन्हें हाजी अली नाम से पुकारती है। दरअसल उनका पुरा नाम सैय्यद पीर हाजी अली शाह बुख़ारी है। हाजी अली शाह बुख़ारी एक समृद्ध व्यापारी परिवार से ताल्लुक़ रखते थे। ये उज़्बेकिस्तान के बुख़ारा प्रान्त के रहने वाले थे। चूँकि इनके जीवन में सुख समृद्धि की कोई कमी नहीं थी। लेकिन हाजी अली शाह का सपना दुनिया की सैर करना और इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करना था। इसीलिए उन्होंने पूरी दुनिया की यात्रा करने का फ़ैसला लिया और पूरी दुनिया की यात्रा करते-करते अपने भाई और कुछ अनुयायियों के साथ मुंबई के वर्ली इलाक़े में आकर बस गए। यहाँ इन्होंने अपना व्यापार शुरू किया और इस्लाम का प्रचार प्रसार भी करते रहे। 

लेकिन एक समय के बाद उनके साथ आये हुए कुछ लोगों के साथ उनके भाई भी अपने मूल स्थान की ओर लौटकर चले गए। चूँकि हाजी अली शाह का मन यहीं भारत में लग गया था। उन्हें यह महसूस होने लगा था कि आगे का जीवन अब वे यही रहकर बिताएंगे और अपने धर्म का उस स्थान पर जाकर प्रचार प्रसार करते रहेंगे। इसलिए उन्होंने अपने भाई के हाथों में, अपनी माँ के लिए पत्र लिखकर भेज दिया जिसमें कहा गया था कि "उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। वे अब वापस नहीं आ सकते क्योंकि उन्होंने यहीं रहकर इस्लाम धर्म का प्रचार करने का फ़ैसला कर लिया है। कृपया उन्हें माफ़ कर दिया जाए।"


हाजी अली दरग़ाह का इतिहास (haji ali dargah ka itihas)


haji ali ki dargah, mumbai


आपने अभी जाना कि सैय्यद हाजी अली शाह बुख़ारी (syed peer haji ali shah bukhari) एक बहुत ही समृद्ध परिवार से ताल्लुक़ रखते थे। उनके पास किसी भी सुख सुविधाओं की कोई कमी न थी। लेकिन चूँकि वे संत थे। उनका लक्ष्य अपने धर्म का प्रचार कर पूरी दुनिया में फैलाना था। 

ऐसा बताया जाता है कि उन्होंने मक्का की यात्रा करने से पहले अपनी सारी दौलत यानि कि सांसारिक संपत्ति भी त्याग दी थी। तो चलिये पीर हाजी अली (peer haji ali) से जुड़े कुछ वाकये पर नज़र डालते हैं।

•• उनसे जुड़ा एक रोचक वाकया है कि एक बार जब हाजी अली रेगिस्तान के किसी इलाक़े में नमाज पढ़ रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि एक ग़रीब महिला ख़ूब रोते हुए उनके पास से गुज़र रही थी। हाजी अली से रहा नहीं गया। और उन्होंने उस महिला से उसके रोने का कारण पूछा। 

उस महिला ने रोते हुए बताया कि वह घर के लिए तेल ख़रीद कर ला रही थी। लेकिन उसके हाथ से तेल का पात्र गिर गया जिस कारण सारा तेल नीचे बिखर गया। अब वह अपने घर बिना तेल के कैसे जाएगी। उसका पति इस बात से बहुत दुःखी होगा। उनके बीच ख़ूब लड़ाई होगी।

ग़रीब महिला की बात सुनकर पीर हाजी अली ने उसे उस स्थान पर ले चलने के लिए कहा जहाँ उसके हाथों तेल गिरा था। उस स्थान पर जाकर पीर हाजी अली ने अपना अँगूठा ज़मीन में गड़ा दिया। हाजी अली ने जैसे ही अपना हाथ बाहर निकाला। उस स्थान से तेल का फ़व्वारा निकलने लगा। यह चमत्कार देख वह महिला बहुत ख़ुश हो गयी। उसने अपना पूरा बर्तन उस तेल की धारा से भर लिया और ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर चली गयी। 

लेकिन उसके बाद हाजी अली दुखी रहने लगे। उन्हें बुरे-बुरे सपने आने लगे। उन्हें बार-बार सपना आने लगा कि उन्होंने अपने इस कृत्य से पृथ्वी को घायल किया है। वे गुमसुम से रहने लगे। इस तरह वे बीमार पड़ गये। दरअसल उन्हें लगने लगा था कि उन्होंने धरती माँ को चोट पहुँचाई है। और तब से उनका अधिकांश समय पछतावे और दु:ख से भरा हुआ बीतने लगा। जिस कारण वे अस्वस्थ व बेचैन रहने लगे।

वे अपनी इस बेचैनी से सुक़ून पाने और साथ ही व्यापार करने के लिए वे अपने भाई के साथ मुम्बई के उसी स्थान पर पहुँच गए जहाँ आज ये दरग़ाह स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि कुछ समय बीत जाने के बाद हाजी अली के भाई साहब मुम्बई से वापस लौट गए। लेकिन पीर हाजी अली यहीं रह गये। और यहाँ रहकर इस्लाम का प्रचार प्रसार करने में लग गए।

•• हाजी अली के संबंध में एक और कहानी यह भी प्रचलित है कि उन्होंने मक्का की यात्रा के दौरान अपनी सारी दौलत ग़रीबों और ज़रूरतमंदों में दान कर दी। और अपनी मृत्यु तक वह लोगों में इस्लाम के बारे में ज्ञान फैलाते रहे। अपनी मृत्यु से पहले उन्होंने अपने अनुयायियों को सलाह दी थी।


मक्का की यात्रा के दौरान जब उनकी मौत हो गयी तब उनके भक्तों, अनुयायियों ने उनके कहे अनुसार हाजी अली के शरीर को एक ताबूत में बंद कर समंदर में बहा दिया। लेकिन उसके बाद जो हुआ, उनके अनुयायियों के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए किसी चमत्कार से कम न था। जो कि आज भी एक रहस्य बन कर रह गया है। आइये जानते हैं हाजी अली दरग़ाह का रहस्य क्या है? 


क्या है हाजी अली दरग़ाह के रहस्य की कहानी (haji ali dargah ke rahasya ki kahani)


haji ali dargah ki photo

हैरानी की बात यह है कि उनका शव रखा वह ताबूत समुंदर में बिना डूबे लहरों के सहारे बहते-बहते वापस मुम्बई आ पहुँचा। दूसरी हैरानी यह थी कि उनके उस ताबूत में एक बूंद भी पानी नहीं गया था। इस चमत्कारिक घटना के बाद उनके अनुयायियों द्वारा मुम्बई के पास ही समंदर में उसी टापू पर उनकी याद में यह दरग़ाह बना दी गयी। तब से उनके भक्तों को यह विश्वास हो गया कि हाजी अली के ताबूत की ही तरह हाजी अली की दरग़ाह के अंदर भी समंदर का पानी प्रवेश नहीं कर सकता।


यही कारण है कि दरग़ाह शरीफ़ (मुम्बई की हाजी अली मस्जिद) उसी स्थान पर बनायी गयी है जहाँ समुद्र के बीच में उनका कफ़न (ताबूत) आराम करने के लिए आया था, जहाँ यह समुद्र के ऊपर उठने वाली चट्टानों के एक छोटे से टीले पर स्थित था।

 

संरक्षण के लिए क्या किया जा रहा है? | Haji Ali Dargah ki repairing


haji ali ki dargah image

समुद्री हवाओं और प्रति सप्ताह लगभग 80 हज़ार पर्यटकों के लगातार आवागमन के कारण 600 साल पुरानी इस मुम्बई की हाजी अली दरग़ाह की संरचना लगातार नष्ट हो रही है। 

हाजी अली दरग़ाह का सबसे हालिया संरचनात्मक उन्नयन अक्टूबर 2008 में शुरू हुआ था। दरगाह को पहली और दूसरी गुणवत्ता वाले सफेद संगमरमर से सजाया गया था। मरम्मत और संरचनात्मक कार्य को दो चरणों में पूरा करने के लिए चौबीस महीने लगने की परिकल्पना की गई थी।

हालांकि 1916 में हाजी अली दरग़ाह ट्रस्ट के दायरे में आ गई थी। इसके बाद एक प्रवेश द्वार के साथ 1950 में परिसर में एक अस्पताल जोड़ा गया। फ़िर 1960 और 1964 में मस्जिद और दरग़ाह शरीफ़ का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण किया गया।

बाद में 1964 में मस्जिद की ओर जाने वाले संकरे रास्ते को भी 1990 तक फ़िर से तैयार किया गया था। इन सभी पुनर्निर्माण के बाद, दरग़ाह का पूरा एरिया अब लगभग 5000 वर्ग मीटर का हो गया है।



अनेक फ़िल्मों में ली गयी है इस दरग़ाह की छबि

• फ़िज़ा फ़िल्म का कर्णप्रिय गीत "पिया हाजी अली" जो कि आज भी उतना ही पॉपुलर और सदाबहार है। इसी हाजी अली दरग़ाह में फ़िल्माया गया था।

• 2008 में आई भारतीय फ़िल्म "मुंबई मेरी जान" में भी इस हाजी अली की दरग़ाह का एक दृश्य फ़िल्माया गया था।

• अमिताभ बच्चन की सुपरहिट हिंदी फिल्म कुली (1983) का Climax (चरमोत्कर्ष) हाजी अली दरग़ाह में फ़िल्माया गया था।

• 2003 में प्रकाशित ग्रेगरी डेविड रॉबर्ट्स के उपन्यास 'शांताराम' में हाजी अली मस्जिद के अनेक संदर्भ मिलते हैं।


मुम्बई की हाजी अली दरग़ाह के दर्शन का समय (entry time)


haji ali ki mazar

यह मक़बरा सप्ताह के प्रत्येक दिन सुबह 5:30 बजे से रात 10 बजे तक आगंतुकों के लिए खुला रहता है। यहाँ प्रवेश करने के लिए आपका मुस्लिम होना अनिवार्य नहीं है। आप चाहे किसी भी धर्म से ताल्लुक़ रखते हों। आप इस दरग़ाह पर जा सकते हो। फ़िर भी, जब आप इस दरग़ाह पर जाते हैं तो आपको विशेष रूप से इस्लामी आस्था से जुड़े भक्त ज़्यादा मिलते हैं। 


इस दरग़ाह में प्रवेश करने के लिए कोई शुल्क नहीं है। लेकिन हाँ! कोई दान देना चाहे तो दान स्वीकार किए जाते हैं। ट्रस्ट द्वारा प्राप्त धन का एक हिस्सा मदरसों (इस्लामी स्कूलों) के रखरखाव और छात्रवृत्ति के वित्तपोषण में ख़र्च किया जाता है।

मस्जिद के अंदर फ़ोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। मस्जिद के बाहर आप बाहर इसकी बेमिसाल ख़ूबसूरती की तस्वीरें और वीडियो बेफ़िक्र होकर ले सकते हैं। आप हाजी अली दरग़ाह के बारे में जानकारी हिंदी में पढ़ रहे हैं।


हाजी अली दरग़ाह में नमाज का वक़्त

इस दरग़ाह में नमाज़ (इस्लामी नमाज़) दिन में पाँच बार पढ़ी जाती है। जो कि निम्न रूपों में जाना जाता है-

1. फ़ज्र (Farz) : यह अरबी शब्द है। जिसका अर्थ होता है 'सुबह' दिन की पहली प्रार्थना। जो सूर्योदय से पहले की जाती है।

2. ज़ुहर (Zuhr) : यह दूसरी नमाज़ है जो दोपहर के समय की जाती है जब सूरज अपने चरम पर होता है।

3. अस्र (Asr) : तीसरी नमाज़ दोपहर बाद पढ़ी जाती है।

4. मग़रिब (Maghrib) : सूर्यास्त के तुरंत बाद चौथी नमाज़ अदा की जाती है।

5. ईशा (Isha) : अंतिम प्रार्थना यानि कि दिन की अंतिम नमाज़ रात के समय की जाती है।

दरगाह का पता-

Haji Ali Dargah Mumbai Address: Dargah Road, Haji Ali, Mumbai, Maharashtra, 400026, India

हाजी अली दरग़ाह मुंबई पता: दरग़ाह रोड, हाजी अली, मुंबई, महाराष्ट्र, 400026, भारत

उम्मीद है आपको यह लेख "मुम्बई की हाजी अली दरग़ाह | haji ali dargah information in hindi" अवश्य पसंद आया होगा। आपने इस लेख के ज़रिये हाजी अली दरग़ाह का क़िस्सा (haji ali dargah ka kissa) विस्तार से जाना होगा। इसी तरह दिलचस्प जानकारियों से भरे लेख पढ़ते रहने के लिए जुड़े रहिये हमारी वेबसाइट चहलपहल के साथ।
- written by Poonam

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