शादी के दिन दूल्हा और दुल्हन को किसी विवाद से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
दोस्तों घर में या अपने किसी ख़ास रिश्तेदारी में शादी जुड़ जाए तो उस दिन से सारा परिवार बस उस ख़ास दिन को यादगार बनाने के लिए दिन रात जद्दोजहद में जुट जाता है। यक़ीनन इस ख़ास दिन के लिए दूल्हा दुल्हन भी उत्साहित रहते हैं।
दरअसल शादी का दिन हर व्यक्ति के जीवन का सबसे ख़ास और यादगार दिन होता है। दोनों के दिलों में उत्साह, ख़ुशी के साथ-साथ कई भावनात्मक दबाव भी होते हैं। क्योंकि उस दिन सभी का केंद्र बिंदु दूल्हा दुल्हन ही होते हैं।
शादी एक ऐसा समारोह है जिसकी तैयारियां चाहे कितने ही शिद्दत से की जाए, कोई न कोई कमी रह ही जाती है। ख़ासकर वर-वधु तो एक दूसरे के साथ प्रेम के बंधन में बंधने की ख़ुशी में लीन रहते हैं। लेकिन दोनों से जुड़े बाक़ी लोगों की अपनी-अपनी समस्याएं, अपनी-अपनी शिकायतें होती हैं।
और यदि यही लोग शादी के उन खुशनुमा पलों में वर वधु के पास आकर अपनी शिकायतों का डोज़ देते रहें तो निश्चित तौर पर वे उनके इस यादगार पल को दाग़दार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाले हैं। ऐसे में आप दोनों के बीच छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियाँ या जल्दबाज़ी में कही गई बातें कभी-कभी विवाद का कारण बन जाती हैं।
इसलिए दूल्हा और दुल्हन दोनों को शादी के दिन कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वर्ना किसी भी ग़लतफ़हमी के चक्कर में दूल्हा दुल्हन के बीच फूट रहे प्रेम के अंकुर, मुरझाकर चकनाचूर भी हो सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि वो कौन सी बातें हैं जिनका ख़्याल रखना चाहिए।
शादी के दिन दूल्हा दुल्हन को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए!!
विवाह के दिन वर-वधु को निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. धैर्य बनाए रखें -
विवाह समारोह में होने वाले कार्यक्रम अक़्सर लंबे हो जाया करते हैं। तय समय पर नहीं हो पाते हैं जिसके चलते लेट-लतीफ़ी और व्यवस्थाओं में छोटी-मोटी परेशानियाँ आ ही जाती हैं। ऐसे समय में घबराने या एक-दूसरे को दोष देने के बजाय शांत रहकर स्थिति को समझना बेहतर होता है। दूल्हा दुल्हन इस तरह की समस्या से परेशान होकर एक दूसरे को दोषारोपण करने से बचें।
2. सम्मानजनक व्यवहार रखें -
दोनों को एक-दूसरे से जुड़े लोगों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार रखना चाहिए। चाहे कोई भी परिस्थिति हो, ऊँची आवाज़ में बात करने, कटु शब्द बोलने या गुस्सा दिखाने से बचना चाहिए। दोनों का एक दूसरे के परिवार के साथ किया गया सम्मानजनक व्यवहार न केवल रिश्ते को मज़बूत बनाता है, बल्कि दोनों परिवारों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
3. दोनों परिवारों की भावनाओं का रखें -
दूल्हा और दुल्हन को यह समझना ही होगा कि शादी के उस ख़ास दिन से दोनों परिवारों की भावनाएँ जुड़ी होती हैं। जिसके चलते भावनाओं में डूबकर, किसी रिश्तेदार से छोटी मोटी ग़लती या किसी कोई उलझन हो सकती है। ऐसी स्थिति में ख़ुद की भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा। क्योंकि ये आम समस्या होती हैं ही और केवल एक दिन के लिए होती हैं। इसे बड़ा मुद्दा बनाकर शादी के ख़ास दिन को बुरा दिन नहीं बनाना चाहिए। यदि कोई समस्या हो भी, तो उसे विनम्रता से संबंधित व्यक्ति तक पहुँचाना चाहिए।
4. सार्वजनिक रूप से बहस में शामिल न हों -
दूल्हा या दुल्हन को यदि किसी बात पर असहमति हो, तो उसे सबके सामने कहने के बजाय निजी तौर पर शांतिपूर्वक चर्चा करनी चाहिए। सार्वजनिक रूप से बहस करने से स्थिति बिगड़ सकती है जिससे दोनों परिवारों को भी असहज महसूस हो सकता है।
किसी ऐसी टिप्पणी, मज़ाक या व्यवहार से बचें जिससे साथी या किसी परिवारजन को ठेस पहुँच सकती हो। यदि कोई मज़ाक पसंद न आए, तो उसे शांतिपूर्वक बाद में बताया जा सकता है।
5. आपसी संवाद शांतिपूर्वक करें -
शादी के दिन दूल्हा।दुल्हन के बीच आपसी संवाद भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी बात को लेकर चिंता या कोई उलझन हो तो उसे आपसे में स्पष्ट और शांति के साथ एक-दूसरे से साझा करें। मन में बातें रखने से ग़लतफ़हमियाँ बढ़ सकती हैं।
दोनों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि शादी का दिन जीवन की पूर्णता का नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत है। इसलिए ध्यान रखें कि अपने किसी ख़ास की शिकायतों के चलते अपने इस नए ख़ास रिश्ते में कड़वाहट न बढ़ने दें। अपने होने वाले पार्टनर को हिम्मत देने का काम करें उससे आपके बीच प्यार और आपसी रिश्ता गहरा होगा।
अपने बारातियों या ख़ास रिश्तेदारों की नासमझी और उलझनों का टेंशन एक दूसरे को न दें। उनकी समस्याएं आम होती हैं जो अगले दिन ठीक हो जाती हैं। लेकिन दूल्हा-दुल्हन के बीच का रिश्ता डगमगाने का ख़तरा बना रहता है। कहीं ऐसा न हो, कि शादी के बाद भी महीनों तक उन्हीं ख़ास रिश्तेदारों के नाम पर पति पत्नी के बीच आपसी जंग चलती रहे।
6. सोशल मीडिया या दिखावे से बचें -
आजकल अलग अलग सोच के लोगों ने अपने हिसाब से तरह तरह के ट्रेंड चलाना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया और फोटो-वीडियो के चक्कर में वायरल होने की होड़ सी लगी हुई है। इस चक्कर में दूल्हा या दुल्हन भी अपनी सीमाएं तोड़ते नज़र आते हैं। जिस कारण उनके परिवार वालों को शर्मिंदगी का शिकार होना पड़ता है। इसलिए अपनी सीमाओं का ध्यान रखें ताकि आपके परिवार वालों को किसी शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े।
यदि किसी रिश्तेदार या अतिथि के कारण तनावपूर्ण स्थिति बन जाए, तो दूल्हा और दुल्हन को स्वयं विवाद में पड़ने के बजाय परिवार के वरिष्ठ सदस्यों या आयोजकों की मदद लेनी चाहिए। इससे स्थिति जल्दी और शांतिपूर्वक संभाली जा सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दोस्तों शादी केवल एक समारोह नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और सहयोग से भरे नए जीवन की शुरुआत है। यदि इस दिन दोनों धैर्य, सम्मान, संवाद और समझदारी का परिचय दें, तो अधिकांश विवादों से बचा जा सकता है और यह दिन जीवनभर सुखद यादों के रूप में याद रह सकता है।
शादी के दिन दूल्हा दुल्हन इस तरह के किसी भी विषय पर या अपने ख़ास लोगों की समस्याओं का ज़रूरत से ज्यादा टेंशन न लें तो बेहतर है। इन सब व्यवस्थाओं पर ध्यान देने का काम पहले ही अपने ख़ास लोगों को सौंप दें। क्योंकि विवाह के दिन की अधिकतर समस्याएं क्षणिक होती हैं।
विशेष तौर उन रिश्तेदारों से भी यही अपेक्षा है कि वे शादी के दिन दोनों परिवारों, ख़ासकर दूल्हा-दुल्हन के पास अपनी शिकायतों का पिटारा लेकर न कूदें। बल्कि हो सके तो ख़ुद उन समस्याओं को सुलझाकर एक उत्कृष्ट शुभचिंतक होने का परिचय दें। कोई ख़ातिरदारी में कमी रह जाए तो ख़ुद को अभागा महसूस न करें। खाना समय पर खा लें, क्योंकि ऐसे मौक़े पर सभी व्यस्त रहते हैं। बल्कि हो सके तो बाक़ी लोगों को खाना खिलाने का फ़र्ज़ अदा करें।
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