दोस्तों ट्रेडिंग (trading) में बार बार Entry लेना यानि कि ख़ुदकुशी करना। जी हां इस लेख के माध्यम से हम आपको आज यह बताने वाले हैं कि ट्रेडिंग में बार-बार एंट्री लेने की आदत किस तरह आपको ख़त्म कर सकती है। ताकि आप ये ग़लती न करें जो मार्केट की दुनिया में अधिकतर लोग करते हैं। ख़ासकर नए नवेले ट्रेडर्स की सबसे बड़ी समस्या यही होती है।
दोस्तों शेयर मार्केट में ट्रेडर्स बिना किसी रणनीति के बार-बार ट्रेड करने की ग़लती करना आम बात होती है। और नए-नए ट्रेडर्स तो इस रोमांचक ट्रेडिंग का मज़ा तब तक लेते रहते हैं जब तक उनका कैपिटल ख़त्म न हो जाए। दरअसल उन्हें लगता है, मार्केट में जितनी ज़्यादा ट्रेडिंग, उतना ही ज़्यादा पैसा। सुबह चार्ट खोलते ही उन्हें हर केंडल में मौक़ा ही मौक़ा नज़र आता है। मार्केट थोड़ा ऊपर गया तो एंट्री, थोड़ा नीचे आया तो एंट्री। चाहे फेक ब्रेकआउट ही क्यूं न हो।
दोस्तों बार बार एंट्री लेना कोई तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि यह एक मानसिक समस्या है। जैसे ही किसी केंडल में हलचल दिखाई देती है, आप उछलकर झट से एंट्री ले लेते हैं। आपको लगता है पैसा कमाने का कहीं ये मौक़ा हाथ से न निकल जाए। इस तरह आप खुद पर अपना कंट्रोल खोते रहते हैं।
दोस्तों बार-बार एंट्री लेने की यह आदत देखने में छोटी ज़रूर लग सकती है, लेकिन इसके गंभीर नुक़सान हो सकते हैं। इससे आपका कैपिटल आपके कंट्रोल से बाहर होकर तेज़ी से ग़ायब भी हो सकता है। तो चलिए इस लेख के ज़रिए समझते हैं कि मार्केट में बार-बार एंट्री लेना कितना ख़तरनाक हो सकता है?
1. भावनात्मक निर्णय -
जब आपके ट्रेड लेने के बाद स्टॉपलॉस होता है तो आप बार-बार एंट्री लेने लगते हैं। और ये एंट्री अक़्सर अपनी भावनाओं के आधार पर लेते हैं। यही सोचकर कि आपकी एक ट्रेड में जो नुक़सान हुआ है उसे तुरंत कवर लेंगे। इसे “रिवेंज ट्रेडिंग” कहा जाता है। कभी-कभी इस चक्कर में आप बड़े नुक़सान में फंस जाते हैं। इसी तरह, अगर आपकी ट्रेड में बेहतर मुनाफ़ा मिल जाए तो उस फ़ायदे को देखकर और भी लालच बढ़ जाता है और आप बिना सोचे-समझे नई एंट्री लेना शुरू कर देते हैं। भावनाओं में डूबकर इस तरह के लिए गए अधिकतर फ़ैसले ग़लत ही साबित होते हैं।
2. अधिक ब्रोकरेज और चार्जेस -
बार-बार एंट्री और एग्जिट करते रहने से ब्रोकरेज, टैक्स और अन्य चार्जेस लगते रहते हैं। ऐसे में अगर आप फ़ायदे में हों तब भी छोटे-छोटे चार्जेस मिलाकर आप नुक़सान में ही रहते हैं। कई बार ऐसा होता है कि ट्रेडर को मुनाफ़ा महसूस होता है लेकिन मार्केट के अंत में हद से ज़्यादा ब्रोकरेज की वजह से सारा मुनाफ़ा, नुक़सान में बदल जाता है।
3. ग़लत सिग्नल्स पर ट्रेड लेना -
मार्केट में हर दिन मुनाफे वाला नहीं होता है। कई बार मार्केट साइडवेज़ (Sideways) चलता है, जहां बार-बार एंट्री लेने से फंसने की संभावनाएं बढ़ जाती है। बिना किसी सही एनालिसिस के हर छोटे मूवमेंट पर, ग़लत सिग्नल्स पर एंट्री ले लेने से नुक़सान बढ़ता है। हम आपको बता दें कि प्रोफेशनल ट्रेडर बार-बार ट्रेड नहीं लेते हैं। वो बेहतर मौक़े का इंतज़ार करते हैं। उन्हें अच्छी तरह पता होता है कि मार्केट का हर मूवमेंट पैसा कमाने के लिए नहीं होता है।
4. पूंजी (Capital) का तेज़ी से ख़त्म होना -
बार-बार ट्रेड लेने का सबसे नकारात्मक पक्ष यह है कि दिन के अंत में छोटे-छोटे नुक़सान मिलकर एक बड़े नुक़सान में तब्दील हो जाते हैं। हर मूवमेंट पर जल्दी जल्दी ख़ूब पैसा कमाने का लालच, आपके कैपिटल को जल्दी ख़त्म कर सकता है। ख़ासकर जब आप बिना स्टॉप-लॉस के ट्रेड करते हैं, तब यह जोख़िम और भी बढ़ जाता है।
5. ओवरट्रेडिंग (Overtrading) की समस्या -
शेयर मार्केट में बार-बार एंट्री लेना ओवरट्रेडिंग कहलाता है। यह एक गंभीर समस्या है, जिसमें ट्रेडर हर मौक़े पर ट्रेड लेने की कोशिश करता है, चाहे वह अच्छा सेटअप हो या ना हो। जब भी उसके सामने चार्ट दिखाई देता है। उसे ट्रेड लेने के अलावा कुछ भी नहीं सूझता है। लेकिन इससे उसके ट्रेड की गुणवत्ता (Quality) कम हो जाती है और नुक़सान की संभावना बढ़ जाती है।
6. मानसिक तनाव और थकान -
लगातार ट्रेडिंग करने से मानसिक दबाव बढ़ता है। हर समय मार्केट पर नज़र रखना, बार-बार निर्णय लेना और मार्केट में एंट्री लेना। फ़िर दिन भर मार्केट के उतार चढ़ाव के साथ साथ, नुक़सान के डर से अपनी धड़कने कम ज़्यादा होते हुए महसूस करना। सचमुच इस तरह की ट्रेडिंग मानसिक रूप से थका देने वाली होती है। इसका असर उसकी निर्णय लेने की क्षमता पर भी पड़ता है, जिससे वह और ग़लत फ़ैसले लेने लगता है।
7. रणनीति (Strategy) का अभाव -
सफल ट्रेडिंग और अच्छे मुनाफे के लिए एक स्पष्ट रणनीति होना अत्यंत आवश्यक है। मार्केट में सही समय पर एंट्री लेना और एग्जिट करना, सचमुच एक जोख़िम भरा काम होता है। लेकिन जब कोई ट्रेडर बार-बार एंट्री लेता है, तो समझो वह सारा दिन बिना किसी तय नियम के ट्रेड करता है। जिस कारण उसकी ट्रेडिंग, बिना किसी प्लान के, बेतरतीबी भरी होती है। इस तरह अनुशासनहीनता के कारण, नुक़सान लगातार बढ़ता ही जाता है।
8. जोख़िम प्रबंधन (Risk Management) -
बार-बार एंट्री लेने वाले ट्रेडर्स, अक़्सर जोख़िम। ज़्यादा लेते हैं और उनका अपने एकाउंट के कैपिटल का कोई नियत प्रबंधन नहीं होता है। और तो और वे प्रबंधन को नज़रअंदाज कर देते हैं। वे हर ट्रेड में ज़्यादा पैसा लगा देते हैं या स्टॉप-लॉस का पालन नहीं करते हैं। इससे एक बड़ा नुक़सान उनकी पूरी पूंजी को प्रभावित कर सकता है।
9. धैर्य की कमी (Lack of Patience) -
ट्रेडिंग में धैर्य बहुत महत्वपूर्ण होता है। अच्छे ट्रेडिंग के लिए अवसर रोज़ नहीं मिलते। लेकिन जो ट्रेडर बार-बार एंट्री लेते हैं, वे इंतज़ार नहीं करते और हर छोटे मौक़े को ट्रेड करने की कोशिश करते हैं। इससे वे अच्छे अवसरों को मिस कर देते हैं और ग़लत ट्रेडिंग में फंस जाते हैं। ज़्यादातर यही होता है कि आपके पास बेहतर सेटअप तो होता है लेकिन उस सेटअप के लागू होने से पहले ही जल्दबाज़ी में आप एंट्री ले बैठते हैं। यही सोचते हैं कि सेटअप तो आपके हिसाब से ही बैठने वाला है। थोड़ा पहले एंट्री लेकर मुनाफ़ा ज़्यादा मिल जाएगा। लेकिन सही मायने में देखा जाए तो आपके ट्रेड का क़त्ल तभी हो चुका होता है जब आप जल्दबाज़ी में ग़लत जगह पर एंट्री ले चुके होते हैं।
10. लंबे समय में नुक़सान -
बार-बार एंट्री लेने से कभी-कभी मुनाफ़ा हो जाना महज़ इत्तेफ़ाक हो सकता है। लेकिन लंबे समय तक यही आदत आपको निश्चित रूप से नुक़सानदायक ही साबित होती है। क्योंकि आप शुरू के ट्रेड्स किसी ख़ास स्ट्रेटजी के साथ ज़रूर करते हैं लेकिन बाद के बार-बार किए जाने वाले ट्रेड्स, बिना किसी प्लान और बिना किसी स्ट्रेटजी के सिर्फ़ और सिर्फ़ लालच में आकर किए जाते हैं। जिसका परिणाम यह होता है कि ट्रेडर धीरे-धीरे अपनी पूंजी खोता चला जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
ट्रेडिंग में बार-बार एंट्री लेना एक ख़तरनाक आदत है, जो भावनात्मक निर्णय, अधिक ख़र्च और पूंजी के नुक़सान की ओर ले जाती है। सफल ट्रेडर वही होता है जो धैर्य रखता है, सही मौक़े का इंतज़ार करता है और तब तक किसी ट्रेड में एंट्री नहीं लेता, जब तक उसके पास कोई मज़बूत और भरोसेमंद रणनीति ना हो। इसलिए शेयर मार्केट में जब भी ट्रेड करें। सोच-समझकर करें। और हमेशा जोख़िम प्रबंधन के नियमों का पालन करें। यही एक ऐसा तरीक़ा है जो आपको लंबे समय में निश्चित रूप से सफलता की ओर ले जा सकता है।
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