श्रीकृष्ण मंदिर डाक्राम सुकड़ी, तिरोड़ा || एक ऐसा देवस्थान, जहां खड़े हो जाने से ही कोसों दूर भाग जाती हैं बाधाएं

महानुभाव मंदिर देव स्थान डाकराम सुकड़ी, तिरोड़ा | श्री क्षेत्र डाकराम सुकड़ी गोंदिया | श्री क्षेत्र डाकराम सुकड़ी Chakradhar swami tample gondia, dakram sukdi 





दोस्तों इंसान पढ़ लिखकर चाहे जितना बड़ा बन जाए। विज्ञान चाहे जितना विकास कर ले। लेकिन कुछ बातें ऐसी अवश्य हैं जिन्हें समझना और समझाना विज्ञान के बस में आज भी संभव नहीं है। सचमुच भक्ति भाव में जो ताक़त और सुकून है वो और कहीं नहीं। बस यूं समझ लीजिए कि जहां पर मानव की सारी शक्तियां, सारे तर्क वितर्क ख़त्म होते हैं वहीं से ईश्वर की ताक़त शुरू होती हैं। 

मनुष्य दुनिया की सारी सुख सुविधाओं को पा लेने की जद्दोजहद में लगा रहता है। फिर भी जब कोई ऐसी परेशानी उसके जीवन में आ पड़ती है जिसका समाधान उसे कहीं नहीं मिलता। अपनी सारी ताक़त लगा देने पर भी जब उसे कोई हल नहीं दिखाई देता। तब वह ऐसे ही शक्ति और प्रभावपूर्ण देवस्थानों की ओर सुकून की तलाश में जा पड़ता है। 

जी हां, आज हम इस अंक में आपको ऐसे ही एक अद्भुत देवस्थान डाकराम सुकड़ी (Dakram Sukdi) के बारे में बताने जा रहे हैं। जहाँ लोग भक्ति भाव से जाते हैं और अपनी समस्याओं का समाधान पाते हैं। इस देवस्थान पर आकर आराम पाने वाले श्रृद्धालुओं की मानें तो, कहा जाता है कि यहां होने वाली आरती के समय खड़े हो जाने मात्र से ही शरीर पर सवार बाधाएं स्वयमेव बाहर निकल जाती हैं।



गोंदिया जिले के तिरोड़ा तहसील में स्थित डाक्राम सुकड़ी, मूलरूप से श्री चक्रधर स्वामी जी के मंदिर के लिए जाना जाता है। यह मंदिर चक्रधर स्वामी (chakradhar swami) जी को समर्पित है, जिन्हें महानुभाव पंथ (mahanubhav panth) का अवतार माना जाता है। यह महानुभाव पंथ का एक धार्मिक स्थान है। यहां चैत्र मास यानि कि प्रतिवर्ष अप्रैल माह में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जहां हज़ारों की संख्या में तीर्थयात्री व पर्यटक यहां आते हैं।

डाकराम सुकड़ी (Dakram sukadi) महाराष्ट्र के गोंदिया शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित एक धार्मिक स्थान है। यहां स्थित चक्रधर स्वामी मंदिर (Chakradhar swami mandir) आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर बोदलकसा बांध और उसके आस-पास की पहाड़ियों के प्राकृतिक परिवेश में स्थित है। जो मंदिर से 2 किमी की दूरी पर है। महानुभाव संप्रदाय का अत्यंत पूजनीय तीर्थस्थल है।

ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री चक्रधर स्वामी (Bhagvan shri chakradhar swami) अपनी यात्रा के दौरान यहां आए थे। उन्होंने यहां विश्राम भी किया था। यह स्थान महानुभाव पंथ (mahanubhav panth) के भक्तों के लिए 'चरणांकित स्थान' में से एक है। जीवों के उद्धारक (जीवों के उद्धार करने वाले) पूर्ण परब्रम्ह परमेश्वर अवतार सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी के श्री चरणों से पुण्य पावन हुआ श्री क्षेत्र डाकराम सुकड़ी (Shri kahetra dakram sukdi) प्रभू की विशिष्टताओं एवं चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है।

श्री क्षेत्र डाकराम सुकड़ी (dakram sukdi) गोंदिया ज़िले का एक मुख्य आकर्षण स्थल है। गोंदिया से तिरोड़ा आने के बाद आप जैसे ही सुकड़ी आयेंगे। यहां पर आपको श्री क्षेत्र डाकराम सुकड़ी मंदिर (Shri kshetra dakram sukdi mandir) देखने मिल जाएगा। यह मंदिर एक तालाब के बीच में बना हुआ है। यह स्थान श्री कृष्ण जी के अवतार श्री चक्रधर स्वामी जी को समर्पित है। यह स्थान अत्यंत मनमोहक है। यहां पर आकर आपको आत्मिक शांति की अनुभूति मिलती है। यह जगह बहुत ही पवित्र है। यहां पर बहुत दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां पर आश्रम भी बने हुए हैं।

यहां पर मंदिर के बारे में बात करें तो डाकराम सुकड़ी में 3 स्थान गांव के पूर्व में बड़े मंदिर के एक ही क्षेत्र में हैं। इसके अलावा 2 स्थान गांव के पूर्व में बड़े मंदिर में हैं। और यहां एक स्थान झील (तालाब) में मंदिर के रूप में बना हुआ है। आइए यहां के कुछ प्रमुख स्थानों व उनसे जुड़े तथ्यों के बारे में बात करते हैं।



1. निद्रा स्थान (Nidra sthan dakram sukdi) 




यह स्थान सुकड़ी गांव के उत्तर-पूर्व में 200 मीटर की दूरी पर एक पूर्वमुखी मंदिर में स्थित है। यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्वज्ञ के समय यहां भिवेश्वर का तीर्थ था।  यह स्थान उस मन्दिर के चौक में है। इसे राजमठ स्थान (Rajmath sthan dakram sukdi) कहा जाता है। 

लीला - कहा जाता है कि मंदिर में आने वाले बाघ को भगाकर स्वामी जी ने इसी स्थान पर आराम पूर्वक निद्रा की थी। यहां प्रतिदिन शाम को 7 बजे आरती होती है। कहा जाता है कि इस आरती में शामिल हो जाने मात्र से आपके अंदर कोई भी बुरी आत्मा, बुरी नज़र या किसी भी प्रकार की प्रेत बाधा पीड़ित के शरीर से अपने आप बाहर निकलकर भाग जाती है। ऐसे अनेक लोग जो यहां वहां घूम घूमकर परेशान होते है। अंत में यहां आकर ठीक होकर जाते हैं।


2. भोजनेश्चर स्थान (Bhojneshwar sthan dakram sukdi)




यह स्थान तालाब में स्थित मंदिर में है। यह स्थान देखने में बहुत ही आकर्षक लगता है। यहां की प्राकृतिक  छटा और धार्मिक एहसासों से आप भी मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह पाएंगे।

लीला: जीवों के उद्धारक (जीवों के उद्धार करने वाले) पूर्ण परब्रम्ह परमेश्वर अवतार सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी के श्री चरणों से पुण्य पावन हुआ श्री क्षेत्र डाकराम सुकड़ी। ये तीर्थ स्थान भारत में प्रसिद्ध है। इस छोटे से गांव में परमेश्वर ने कर पात्र में भिक्षा मांगकर (हाथ में भिक्षा मांग कर) गांव से बाहर परन्तु क़रीब (गांव से लगे हुए) तालाब में भोजन किया था। इसलिए इस स्थान को भोजनेश्वर (आरोगन स्थान) नाम से संबोधित किया जाता है। 


3. सिंहनाद स्थान (Singhnath sthan dakram sukdi)




यह स्थान निद्रा स्थान मंदिर के पूर्व में परिसर के दरवाज़े के अंदर दक्षिण की ओर है। यह स्थान व्याघ्र विंद्रावन के नाम से विशेष तौर पर जाना जाता है। 

लीला - भोजनोपरांत सूर्यास्त होने पर शाम के वक़्त स्वामी निद्रा करने के लिए भीमेश्वर मंदिर (भीमेश्वर नामक देवता का मंदिर) जो कि गांव के बाहर तालाब के क़रीब था। उस मंदिर में जाने के लिए निकले। तालाब के पार (मेढ़) पर गांव के कुछ लोग बैठे हुए थे, उन्होंने स्वामी जी से कहा कि स्वामी जी उस मंदिर ​​में न जाइए, वहाँ बाघ आता जाता रहता है। तब स्वामी जी उनकी बातों पर ध्यान न देते हुए भीमेश्वर मंदिर की ओर रवाना हो गए। उस समय इस जगह घनघोर जंगल हुआ करता था। मंदिर में जाकर स्वामी जी ने मंदिर के मध्य भाग में अपना आसन लगाया।

कुछ समय पश्चात स्वामी जी ने वहा निद्रा की, निद्रा करते वक़्त मध्य रात्रि में गुर्राते, दहाड़ते हुए बाघ प्रवेश द्वार से मंदिर में आ रहा था। बाघ को आता देख स्वामी जी ने  सिंहनाद (सिंह की गर्जना) किया। उस सिंहनाद को सुनते ही बाघ ने मंदिर में लगी हुई चारदीवारी ( परकोट/बाउंड्रीवाल) पर से छलांग लगाई और भाग गया। इसके बाद स्वामी जी ने शांति से इस स्थान पर निद्रा की।



प्रातः काल गांव के भक्त लोग भीमेश्वर मंदिर की ओर पूजा करने के लिए ताड़, ढोल, मांदर, नगाड़े जैसे अनेक वाद्ययंत्र बजाते हुए आने लगे। ग्राम के भक्त लोग प्रतिदिन बड़े यंत्र या बाजा बजाते हुए ही मंदिर आते थे ताकि बाघ वहां से भाग जाए। और जब बाघ मंदिर से निकल कर भाग जाता। तब भक्तगण मंदिर में पूजा आरती करते। यह नित्य प्रतिदिन का कार्य था।

मंदिर के पास आने पर लोगों ने देखा कि आज बाघ मंदिर से बाहर ही नहीं निकल रहा है। यह सोच लोग आपस में कहने लगे कि कल यहां एक स्वामी जी आए थे, उसे खाने में बाघ मग्न होगा। ऐसा ग्रामीण भक्त लोगों को लगने लगा।

कुछ देर बाद लोगों ने हिम्मत कर मंदिर में झांकने की कोशिश की और देखा कि स्वामी जी ध्यान मुद्रा में बैठे हुए हैं। यह सब देखकर ग्रामीण भक्त गणों में चर्चा होने लगी कि यह कोई ईश्वरीय पुरुष अवतार है। यह कोई साधारण पुरुष नहीं है। सभी ने स्वामी जी के श्री चरणों में दंडवत प्रणाम किया और नतमस्तक होकर पूछने लगे कि स्वामी जी यहां पर बाघ आया था क्या? और किस तरह से यहां से चला गया? तब स्वामीजी ने कहा कि "एथौनी सिंहनाद केला" अर्थात हमने यहां से सिंह गर्जना की। और वह बाघ परकोटा से छलांग लगाकर इस जंगल से बाहर निकल गया। अब वह यहां कभी नहीं आएगा। सचमुच तब से यहां पर बाघ ने फ़िर कोई उपद्रव नहीं किया।

इस तरह स्वामी जी ने पूरे गांव के भाविक जन समुदाय को अभयदान देकर निर्भय किया। ऐसी ये लीला स्वामी जी ने इस स्थान पर की। इसलिए इस स्थान को सिंहनाद बोला जाता है। ऐसी यह लीला स्मरणीय है।



4. साधुल बाबा स्थान (Sadhul baba sthan dakram sukdi)




सुकड़ी गांव के श्रीमान बलिराम तेली के घर साधुल बाबा नामक स्थान है। कहा जाता है कि यहां श्रीमान बलिराम तेली के घर में आकर स्वामीजी ने भिक्षा ग्रहण की थी। यहीं से भिक्षा लेकर भोजनेश्वर (तालाब) की और चले गए थे। तभी से गांव के अंदर बलिराम तेली जी के घर में यह पूजनीय देवस्थान स्थिति है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे दिल से इस स्थान पर मांगता है, उसकी अभिलाषा ज़रूर पूरी होती है।


5. विघ्नेश्वर स्थान (Vighneshwar sthan dakram sukdi)




सुकड़ी ग्राम का यह स्थान भी भक्तों के लिए प्रमुख स्थानों में से एक है। लोग इस स्थान पर भी सच्ची आस्था से माथा टेकने आते हैं। विघ्नेश्वर देव स्थान पर आकर श्रद्धालु अपने सारे विघ्न (परेशानी) से छुटकारा पाने की कामना पूरी श्रद्धा से करते हैं। 


अप्रत्यक्ष स्थान -

• निद्रा स्थान के पीछे चंदनेश्वर नामक स्थान।
• निद्रा स्थान के पीछे उखलेश्वर नामक स्थान।
• सिंहनाद स्थान के दक्षिण में खिड़केश्वर नामक स्थान है।
निद्रा स्थान के पूर्व में स्थित मंदिर में उम्बर वट नामक स्थान है।
• सिंहनाथ स्थान के ठीक सामने ही प्रांगण में कपूरविहिर नामक स्थान स्थित है।


डाकराम सुकड़ी पहुंच मार्ग -

डाकराम सुकड़ी तक पहुंचने के लिए बस, ट्रेन और वायुमार्ग द्वारा निम्न तरीक़े से पहुंचा जा सकता है -

बस मार्ग (Bus marg dakram sukdi)

गोंदिया शहर में बसों का अच्छा नेटवर्क होने के कारण क्षेत्र के अन्य प्रमुख स्थानों तक बसों के माध्यम से पहुंचना  आसान है। कुछ महत्वपूर्ण गंतव्य जहां गोंदिया से बसें चलती हैं वे हैं नागपुर, पुणे, अहमदनगर, वर्धा, जालना और औरंगाबाद। ऐसा इसलिए है क्योंकि गोंदिया शहर मुंबई से कोलकाता राजमार्ग पर स्थित है जो नागपुर से होकर गुज़रता है।
 
रामटेक से सुकड़ी (तुमसर, तिरोड़ा होते हुए) 91 कि.मी.  है। भंडारा से सुकड़ी (तुमसर होते हुए) 60 कि.मी. है। नागपुर से सुकड़ी (भंडारा, तुमसर, तिरोड़ा होते हुए) 122 किमी है। 



ट्रेन मार्ग (Train marg dakram sukdi)

गोंदिया शहर में एक अच्छी तरह से स्थापित रेलवे स्टेशन है जहाँ से कई ट्रेनें गुज़रती हैं, जिनमें कोलकाता और मुंबई शहरों की ट्रेनें भी शामिल हैं। आप नागपुर और मुंबई के स्टेशनों से गोंदिया के रेलवे स्टेशन तक ट्रेनों का विकल्प भी चुन सकते हैं। ट्रेन का किराया करीब 300 रुपये होगा।

तिरोड़ा नागपुर-गोंदिया रेलवे पर एक रेलवे स्टेशन है। आप वहां उतरकर सुकड़ी जा सकते हैं। रामटेक से कन्हान जंक्शन होते हुए तिरोड़ा पहुंचा जा सकता है।


वायु मार्ग (Vayu marg dakram sukdi)

यहां से 122 किमी दूर निकटतम हवाई अड्डा, नागपुर हवाई अड्डा है। जहां से संपूर्ण भारत ही नहीं अपितु विश्व के किसी भी कोने से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। नागपुर हवाई अड्डे के बाद, नागपुर से एस टी बस सेवा भी उपलब्ध है। या फिर पर्सनल सुविधा से भी पहुंचा जा सकता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

सचमुच भक्ति और श्रद्धा से बड़े बड़े कार्य ईश्वर की कृपा से सिद्ध हो जाते हैं। यहां पर आने वाले भक्तों, श्रद्धालुओं को ईश्वर के सामर्थ्य की अनुभूति हो ही जाती है। ऐसा ही यहां का तीर्थ स्थान मानव व मानव जीवन को संजीवनी देने वाला है।

राजमठ, सिंहनाद, भोजनेश्वर, विघ्नेश्वर ये यहां के मुख्य स्थान हैं। उम्बरवट, कापूरविहिर, विघ्नेश्वर, भिक्षास्थान इत्यादि स्थान भी इसी जगह पर हैं। दुःख, रोग, व्याधि से तप्त हुए जीवों को दुखों से छुटकारा देने वाला यह स्थान किसी संजीवनी से कम नहीं। किसी भी प्रकार की बाधा जैसे- शारीरिक, मानसिक, पागलपन यहां बिना दवा के धरना देकर रहने से स्वस्थ होते हैं। यहां रोते हुए आने वाले हंसते हुए जाते हैं। 

महानुभाव मंदिर देव स्थान सुकड़ी ( सचमुच अदभुत चमत्कारों से परिपूर्ण है। यहां जो अदभुत एहसास होते हैं इन एहसासों को स्वयं आकर ही पाया जा सकता है। हमारे पास पर्याप्त शब्द नहीं हैं। इस स्थान पर असंख्य लोग ऐसे भी आते हैं जो लाखों रुपए ख़र्च करके कहीं भी ठीक नहीं हो पाते। किंतु यहां आकर प्रभु के आशीर्वाद से उन्हें चमत्कारी आराम मिलता है। लोग यहां आकर निशब्द हो जाते हैं। कोई गृह बाधा से या भूत बाधा से पीड़ित हो, यहां आते ही सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी उन्हें उनकी बाधाओं से छुटकारा दिला देते हैं।

Disclaimer : यह लेख हमने किसी धर्म, संप्रदाय का विशेष प्रचार या आलोचना करने के उद्देश्य से नहीं लिखा है। और ना हि इसका उद्देश्य किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देना है। इसका उद्देश्य रिसर्च के दौरान प्राप्त जानकारी, यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास एवं इस स्थान की धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से हो रही प्रसिद्धि को आपसे साझा करना है। 

उम्मीद है हमारा यह लेख "कृष्ण मंदिर डाकराम सुकड़ी तिरोड़ा, गोंदिया, महाराष्ट्र | Mahanubhav panth mandir sukadi dakram, sukadi"  से जुड़ी जानकारी आपको अवश्य अच्छी लगी होगी। ऐसी ही अदभुत जानकारियां व अन्य दिलचस्प टॉपिक्स पढ़ने के लिए जुड़े रहिए हमारी वेबसाइट चहलपहल के साथ।

(- By Alok)


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