लू क्या है? जानिए लू लगने के लक्षण और इससे बचने के उपाय क्या हैं?

लू किसे कहते हैं? (लू लगने के कारण, लू लगने के लक्षण और उपचार, गर्मी में लू के लक्षण, गर्मी में लू से बचने के लिए उपाय)

दोस्तों इन दिनों गर्मी अपनी चरम पर है। सूर्य देवता ऐसे  प्रतीत हो रहे हैं मानो वे अपना विराट रूप धारण किए हुए हम पर अपनी नाराज़गी जता रहे हों और कह रहे हों कि हे मानव, अब तो इस प्रकृति के साथ मनमानी करना बंद कर दे। ख़ैर इस टॉपिक पर चर्चा हम किसी और लेख में करेंगे। फिलहाल हम लू क्या है? गर्मी में लू लगने के लक्षण और बचने के उपाय क्या हैं? (lu kya hai, iske lakshan aur bachne ke upay kya hain?) इस टॉपिक पर चर्चा करने वाले हैं?



दोस्तों गर्मी बढ़ते ही तेज़ गर्म हवाओं के साथ साथ लू की समस्या सबसे ज़्यादा बढ़ जाती है। यह भी कड़वा सत्य है कि गर्मी के दिनों में अधिकांश लोग ख़ुद से की जाने वाली लापरवाही की वजह से भी मुसीबत में फंस जाते हैं। तो चलिए हम इस लेख में लू लगने का मुख्य कारण क्या है? लू से कैसे बचा जा सकता है? जानने का प्रयास करते हैं।


लू क्या है? इसके लक्षण क्या हैं? (Lu kya hai? iske lakshan kya hain?)

गर्मियों में पश्चिम से पूर्व दिशा में चलने वाली धूल भरी, गर्म, तेज़, उष्ण तथा शुष्क हवाओं को लू कहा जाता है। इस तरह की हवाएं प्रायः मई और जून में चलती हैं। लू के समय तापमान 45 से 50 डिग्री तक जाने की पूर्ण संभावना होती है।

सामान्यतया लू की संभावना तब बढ़ जाती है जब किसी स्थान का अधिकतम तापमान ख़ासकर मैदानी इलाकों में 40 डिग्री और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। हालांकि यह लू भारतीय मानसून के आने और गर्मी की समाप्ति के साथ समाप्त हो जाती है।



लू लगने का कारण

लू लगने के कारण की बात करें तो गर्मी में अत्यधिक तापमान और जलने वाली हवा ही लू लगने का असली कारण होती है। गर्मी और तेज़ धूप में निकलने से लू लगने का ख़तरा बढ़ जाता है। मई-जून में हीटवेव के काफ़ी मामले सामने आते हैं।

यह गर्मी के मौसम में घटने वाली एक सामान्य प्राकृतिक घटना है, जो कई क्षेत्रों में अत्यधिक तापमान और सूखे की स्थिति को बढ़ाता है। इसका प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर अत्यधिक असर डालता है। 


लू लगने के लक्षण - 

अगर आपके शरीर का तापमान 104°F (40°C) से ज़्यादा है और टेंपरेचर को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है तो समझ लें आपको लू लग गई है। गर्मी में लू लगने के लक्षण (garmi me lu lagne ke lakshan) निम्न होते हैं - 

• व्यक्ति का शरीर अंदर से अत्यधिक गर्म महसूस होने लगता है। अक़्सर लू लगने पर पसीना नहीं आता है।
• मतली यानि कि जी मचलाना और उल्टी आना भी इसके लक्षण होते हैं।
• त्वचा का सुर्ख लाल होना, डाई होना, लाल चतके और तेज़ बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं। 
• शरीर में तेज़ दर्द होना जैसे कि मांसपेशियों में ऐंठन होने लगती है।
• धड़कन तेज़ हो जाती है, जिस कारण घबराहट, बेचैनी महसूस होने लगती है।
• व्यक्ति को लूज़ मोशन शुरू हो जाते हैं जिससे लगातार डिहाइड्रेशन का ख़तरा बढ़ता जाता है।

उपरोक्त लक्षण शुरूआती दौर में भले ही हल्के दिखाई देते हों लेकिन समय के साथ अगर उपचार न किया जाए तो यही लक्षण गंभीर रूप धारण कर लेते हैं। यहां तक कि मस्तिष्क, ह्रदय गुर्दे और मांसपेशियों संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। 

दोस्तों लू के दुष्प्रभाव की बात करें तो आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि इस लू से इंसान की मौत भी हो सकती है।



लू लगने से मृत्यु क्यों हो सकती है?

धूप में घूमने से लगने वाली लू से इंसान की मृत्यु भी हो सकती है। आइए जानते हैं कि लू लगने से आख़िर ऐसा क्या होता है जिस कारण मौत भी हो सकती है।

 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, हम आपको बता दें कि इसी तापमान पर हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीक़े से काम करना बंद कर देते हैं।

• हमारा शरीर पसीने के रूप में पानी को बाहर निकालकर 37° सेल्सियस तापमान संतुलित रखने का प्रयास करता है। इसलिए लगातार पसीना निकलते वक्त हमें विशेष रूप से पानी पीते रहना चाहिए।

• पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालता रहता है।

• बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री सेल्सियस के पार होते ही शरीर की कूलिंग व्यवस्था भी ठप्प हो जाती है, तब शरीर के अंदर का तापमान 37° डिग्री से पार होने लगता है।

• शरीर का तापमान 42° सेल्सियस पार होते ही रक्त गरम होने लगता है। परिणामस्वरूप रक्त में मौजूद प्रोटीन पकने लगता है। ठीक वैसे ही, जैसे उबलते पानी में अंडा पक रहा हो।

• ऐसी स्थिति में स्नायु कड़क होने लगते है इस दौरान सांस लेने के लिए ज़रूरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते हैं।

• शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है। परिणामस्वरूप ब्लडप्रेशर low (कम) हो जाता है, महत्वपूर्ण अंगों के साथ साथ, ब्रेन तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है।

• व्यक्ति कोमा में चला जाता है जिस कारण व्यक्ति के शरीर के प्रत्येक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं और उसकी मृत्यु हो जाती है।

• गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। ताकि हमारे शरीर को 37° डिग्री पर मेन्टेन करने में आसानी हो सके।


दोस्तो ऐसे मौसम में ख़ुद को लू से बचाना हो तो लू से बचने के उपाय जानना निहायत ही ज़रूरी है। निश्चित रूप से यह सजगता आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित हो सकती है। यह आपको गर्मी से होने वाली विकट परिशानियों से बचा सकती है।


लू से कैसे करें बचाव (lu se kaise karen bachav) 

लू से बचने के उपाय (lu se bachne ke upay) निम्नलिखित हैं- 

• दिन में 12 बजे से 4 बजे के बीच ज़्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर ही रहने का प्रयास करें। यदि निकलना ज़रूरी हो तो शरीर को अच्छी तरह ढककर निकलें। ज़ेब में छोटा सा प्याज़ ज़रूर रख लें।

 पानी जितना अधिक हो सके, पीने की आदत डालें। अधिक मात्रा में पानी पीते रहने से शरीर में लगातार ठंडक बनी रहती है। कृपया अपने सगे सम्बन्धियों को भी पानी की कमी से पीड़ित न होने दें।

• गर्मी के मौसम में पेय पदार्थों का सेवन अधिक करें जैसे ठंडा पानी, नींबू पानी, शिकंजी, शर्बत, कैरी का पना, फलों का रस, छाछ, लस्सी की मात्रा अवश्य लें। इनसे शरीर में नमी बनी रहेगी और ऊर्जा भी बनी रहेगी।

• किसी भी अवस्था में दिन भर में कम से कम 3 ली. पानी ज़रूर पीयें। किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली. पानी लें। लू से बचे रहने का यह सबसे सही तरीक़ा है।

• ब्लड प्रेशर पर बारीक़ी से नज़र रखें। हीट स्ट्रोक का ख़तरा हर किसी के लिए है। इसमें बिल्कुल भी लापरवाही न करें। मई-जून में आने वाला हीट वेव कोई मज़ाक नहीं है।

• इन दिनों ठंडे पानी से नहाएं। ठंडे पानी से समय समय पर ख़ुद को पोंछते रहें। ज़रूरत पड़े तो दिन में 2 बार 6 दिन में 2-3 बार भी नहा सकते हैं।

• मांस का प्रयोग छोड़ें या कम से कम करें। फल और सब्ज़ियों को भोजन में ज़्यादा स्थान दें।

• इन दिनों अल्कोहल या कैफ़ीन का सेवन करने से बचना चाहिए। जितना संभव हो ख़ुद को नशा करने से बचाएं।

• इन दिनों भारी व्यायाम से बचें, बल्कि हल्का व्यायाम ज़रूर करें वह भी सुबह या शाम के समय ही करें जब वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा हो।


• गर्मी में कूल रहने के लिए आप हल्के रंग के और ढीले ढाले कपड़े पहनने की आदत डालें। अगर बाहर निकलना बेहद ज़रूरी हो तो ख़ुद को अच्छी तरह ढंककर और कोई भी सनस्क्रीन क्रीम लगाकर निकलें।

• आप यदि कार में ट्रेवल कर रहे हों तो चलते AC के दौरान अचानक ही बाहर न निकलें। गंतव्य स्थान आने के कुछ मिनट पहले ही कार का AC बंद कर दें।

उम्मीद है आज के हमारे लेख लू क्या है? लू लगने के लक्षण और बचने के उपाय क्या हैं? (lu kya hai, iske lakshan aur bachne ke upay kya hain?) में दी गई जानकारी आपके लिए अवश्य ही फ़ायदेमंद होगी।

(- By Alok)


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