10 टिप्स ट्रेडिंग करते समय अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए | ट्रेडिंग करते समय अपनी भावनाओं पर काबू कैसे पाएं?
दोस्तों आज के समय में ऑप्शन ट्रेडिंग एक ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ कम से कम समय में अधिक लाभ कमाने की संभावना होती है, लेकिन इसका एक कड़वा सच यह भी है कि इसमें उतना ही अधिक जोख़िम भी होता है। लेकिन इसका एक सच यह भी है कि इसमें जोख़िम का सबसे बड़ा कारण केवल बाज़ार नहीं, बल्कि ख़ुद ट्रेडिंग करने वाले की भावनाएँ (imotions) होती हैं।
ट्रेडिंग के वक़्त लगने वाला डर, लालच, गुस्सा, पछतावा या ज़रूरत से ज़्यादा उत्साह, ये सभी भावनाएं अक़्सर ग़लत निर्णय लेने पर मजबूर कर देती हैं। इसलिए ऑप्शन ट्रेडिंग में सफल होने के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ भावनात्मक नियंत्रण भी बेहद ज़रूरी है। एक बात गांठ बांध लें कि ऑप्शन ट्रेडिंग में इमोशंस आपके लिए सबसे बड़े दुश्मन भी हो सकते हैं और यदि सही तरीक़े से संभाल लिए जाएँ तो यही आपकी ताक़त भी बन सकते हैं।
ऑप्शन ट्रेडिंग (Option trading) में होने वाले ज़्यादातर नुक़सान ग़लत एनालिसिस से नहीं, बल्कि लालच, डर और जल्दबाज़ी के कारण होते हैं। वैसे ऑप्शन ट्रेडिंग और इमोशंस, किसी भी ट्रेडर के लिए एक सामान्य सी घटना है। और इससे पूरी तरह छुटकारा पाना असंभव है। लेकिन कुछ उपयुक्त तरीकों से इसे नियंत्रित ज़रूर किया जा सकता है।
दरअसल आपका जब कोई ट्रेड मुनाफे में चल रहा होता है तो आपके मन में लालच पैदा हो जाता है कि क्यूं न और भी कमा लिया जाए। इसी लालच के चलते जब आपका ट्रेड नुक़सान में चला जाता है। तब आप बदले की ट्रेडिंग यानि कि Revenge Trading में लग जाते हैं। इस तरह मार्केट से सीधे सीधे बदला लेने की नीयत से की गई भावनात्मक ट्रेडिंग आपकी पूँजी को तेज़ी से ख़त्म कर सकती है। आइए इस लेख में हम कुछ प्रैक्टिकल और ट्रेडिंग के वक़्त अपनाए जाने वाले ख़ास तरीकों के बारे में जानते हैं।
शेयर मार्केट में इमोशंस कैसे कंट्रोल करें (Share market me emotions kaise control karen)
ऑप्शन ट्रेडिंग या शेयर मार्केट करते टाइम अपनी भावनाओं को कंट्रोल करने के तरीक़े निम्न हैं -
1. पहले से ट्रेडिंग प्लान बनाएं -
ऑप्शन ट्रेडिंग के दौरान अपनी भावनाओं पर नियंत्रण के लिए सबसे प्रभावी तरीक़ा है, एक स्पष्ट ट्रेडिंग प्लान का बनाना। इस प्लान के अंतर्गत पहले से यह तय होना चाहिए कि हमें आज के मार्केट में किस स्थिति में एंट्री लेनी है, कितना टारगेट रखना है और कहाँ स्टॉप-लॉस लगाना है। जब नियम पहले से तय होते हैं, तो ट्रेड के दौरान भावनाएँ ज़रा कम ही हिलोरें मारती हैं। बिना किसी प्लान के ट्रेड करना मतलब इमोशंस के हवाले ख़ुद को छोड़ देना होता है।
2. स्टॉप-लॉस का सख़्ती से पालन करें -
ज़्यादातर मौकों पर, बिना स्टॉप लॉस ट्रेड करना ही आपके डर और गुस्से का सबसे बड़ा कारण बन जाता है। दरअसल स्टॉप-लॉस (stop loss) केवल पूँजी बचाने का साधन नहीं है, बल्कि अपनी भावनाओं पर नियंत्रण पाने का भी तरीक़ा है। कई बार ट्रेडर अपना नुक़सान स्वीकार नहीं करना चाहता और स्टॉप-लॉस हटाकर भगवान भरोसे बैठा रहता है। यह उसके डर और अहंकार का परिणाम होता है।
इसलिए जब भी स्टॉपलॉस लगाएं, उसे पक्की तरह मानें भी। ख़ास तौर पर 'थोड़ा और रुक जाते हैं' वाली सोच से बचें। किसी भारी भरकम नुक़सान से बेहतर है थोड़ा नुक़सान लेकर मार्केट से अलग हो जाएं। क्योंकि कैपिटल बचा रहा तो आप कल भी ट्रेड कर सकते हैं।
3. उपयुक्त पोजीशन साइज़ चुनें -
जब आपकी पूंजी का बहुत बड़ा हिस्सा, ट्रेडिंग में लगा हुआ होता है, तब स्वाभाविक रूप से आपकी भावनाएं विचलित होती रहती हैं। जब तक आप अपनी ट्रेड से पूरी तरह फ्री नहीं हो जाते, आपकी धड़कनें भी ऊपर नीचे डोलती रहती हैं। इसलिए अपनी ट्रेड का साइज़ उतना ही रखें जिसका नुक़सान होने पर आप किसी मानसिक दबाव में आने से बच सकें। आप अपने उस नुक़सान को स्वाभाविक रूप से सहने के लिए तैयार हों। याद रखें, जब दाँव छोटा हो, तभी निर्णय भी तर्कसंगत होते हैं और हम भावनात्मक उतार-चढ़ाव से भी बच जाते हैं।
4. ओवर-ट्रेडिंग से बचें -
जब पैसा आपके हर एक क्लिक पर आने लगे, तो मन में लालच होना लाज़मी है। और ऑप्शन ट्रेडिंग में यही होता है। लगातार चार्ट देखते रहना, इमोशनल होकर हर एक मूवमेंट पर ट्रेड करना, किसी बड़े नुक़सान को निमंत्रण देने जैसा है। और तो और ओवर-ट्रेडिंग से न केवल ब्रोकरेज बढ़ता है, बल्कि भावनात्मक फ़ैसलों से मानसिक थकान भी होती है।
बेहतर है कि सीमित और विश्वासपूर्ण ट्रेड ही लिए जाएँ। हर मूव में ट्रेड करना ज़रूरी नहीं, अच्छा सेटअप आए तभी ट्रेड करें। अपने लिए अपनी लिमिट ख़ुद तय करें। ट्रेडिंग के इस अथाह सागर से अपना हिस्सा लेकर यथासंभव अलग हो जाएं और अपनी स्क्रीन फ़ौरन बंद कर दें।
5. नुक़सान को व्यक्तिगत न लें -
अधिकतर ट्रेडर नुक़सान होने पर ख़ुद को ज़रूरत से ज़्यादा दोष देने लगते हैं। जिस कारण उनके मन में गुस्सा और हताशा पैदा होती है, जो अगले ट्रेड को और भी ख़राब कर देती है। इसलिए अपने loss को कभी व्यक्तिगत न लें। यह भली भांति जान लें कि बाज़ार अनिश्चित है और नुक़सान स्वाभाविक। हार का बदला लेने के लिए मार्केट से लड़ाई न करें। बदला लेने वाला ट्रेड सबसे ख़तरनाक होता है। बल्कि हर ट्रेड से सीख लेने की कोशिश करें। 20–30 ट्रेड के बाद आपको अपने पैटर्न ख़ुद-ब-ख़ुद नज़र आने लगेंगे।
6. ब्रेक लेना सीखें -
मार्केट में लगातार नुक़सान होने पर ट्रेड जारी रखना अक़्सर बदले की भावना से प्रेरित होता है। ऐसे समय में कुछ समय के लिए बाज़ार से दूरी बनाना बेहतर होता है। ब्रेक लेने से मानसिक संतुलन लौटता है और दोबारा शांत मन से बेहतर निर्णय लेने में आप फ़िर से ख़ुद को सक्षम पाते हैं। कभी भी गुस्से, तनाव या हताशा में ट्रेड लेने की कोशिश न करें। यह जान लें कि थका हुआ दिमाग़ अधिकतर ग़लत फ़ैसले ही लेता है।
7. यथार्थवादी अपेक्षाएँ रखें -
ऑप्शन ट्रेडिंग को कम से कम समय में अमीर बनने का ज़रिया मानना सबसे बड़ी ग़लती है। इस तरह की अवास्तविक उम्मीदें लालच को जन्म देती हैं। बेहतर यही है कि ऑप्शन ट्रेडिंग के ज़रिए आप छोटे लेकिन लगातार लाभ पर ध्यान दें, ऐसा करने से निश्चित तौर पर आप भावनात्मक दबाव से दूर रह पाएंगे और ट्रेडिंग करते समय निर्णय भी बेहतर ले सकेंगे।
8. अनुशासन और धैर्य विकसित करें -
सच कहें तो ट्रेडिंग के वक़्त अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करना इतना आसान नहीं है। इसके लिए निरंतर अभ्यास, आत्म-विश्लेषण और अनुशासन की आवश्यकता होती है। ऑप्शन ट्रेडिंग में धैर्य रखना बेहद ज़रूरी है। क़सम खा लें कि अब हर दिन ट्रेड नहीं करना है। सही मौक़े का इंतज़ार करने में ही समझदारी है।
9. बार बार स्क्रीन न देखें -
अक़्सर यही होता है कि हम किसी ट्रेड में प्रॉफिट लेने के बाद भी बार-बार स्क्रीन देखते रहते हैं। परिणाम यह होता है कि हम मार्केट के हर मूवमेंट पर ट्रेड लेने का लालच कर बैठते हैं। वजह होती है अपने इमोशंस पर कंट्रोल न होना। और इस चक्कर में हम अपनी ही ग़लती से अच्छा ख़ासा नुक़सान कर बैठते हैं।
10. बार बार अपने P&L को न देखें -
ट्रेडिंग करते टाइम बार बार अपने P&L को नहीं देखना चाहिए। और ना हि ट्रेडिंग स्क्रीन पर नज़र रखें। क्योंकि बार-बार स्क्रीन पर चल रही कैंडल्स पर नज़र रखने से, मार्केट के किसी भी मूवमेंट को देखकर आपके मन में लालच आ सकता है जिसके चलते आप बिना किसी प्लान या सेटअप के, मार्केट में एंट्री ले सकते हैं। और आप तो जानते हैं कि इस तरह का फ़ैसला आपको कभी भी नुक़सान पहुंचा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
ऑप्शन ट्रेडिंग में सफलता का रहस्य केवल स्ट्रेटेजी या इंडिकेटर्स में नहीं, बल्कि भावनात्मक संतुलन में छिपा है। जो ट्रेडर अपने डर और लालच को पहचानकर नियंत्रित करना सीख लेता है, वही लंबे समय तक बाज़ार में टिक पाता है। याद रखें, बाज़ार हमेशा मौक़े देता रहेगा, लेकिन पूँजी और मानसिक शांति एक बार खो गई तो वापस पाना कठिन हो जाता है। इसलिए ऑप्शन ट्रेडिंग में सबसे बड़ा निवेश अपने इमोशंस पर नियंत्रण सीखने में करें।
यह स्वीकार करें कि शेयर मार्केट में हर दिन कमाई ज़रूरी नहीं। ऑप्शन ट्रेडिंग कोई ATM नहीं है।
कभी कभी ट्रेड न करना भी लाभदायक होता है। नुक़सान से बचने का इससे बेहतर उपाय और कोई नहीं हो सकता है कि आप किसी दिन "No Trade Day" भी रखें। मार्केट से लड़ने से बेहतर है ख़ुद का बचाव करना सीखें। तभी आप लंबे समय तक शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने में सक्षम हो सकेंगे। और साथ ही ट्रेडिंग के दौरान उत्पन्न भावनाओं को नियंत्रित करना भी सीख जाएंगे।
Some more articles :
Tags
शेयर मार्केटिंग
