जानिये क्या हैं कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के लक्षण ꘡ New Variant Omicron in hindi

दोस्तों अभी भी भूल नहीं पाए हैं वो भयावह मंज़र। जब शमशान भी रो पड़े थे लाशों के अंबार को देखकर। असंख्य घरों के चिराग़ बुझ गये अस्पतालों में तड़प-तड़पकर।चहुँओर खौफ़ का माहौल, मास्क लगाने की नसीहतें,  ज़िन्दगी की जद्दोजहद के बीच आहें भरता हम सभी का संघर्ष भला कौन भूल सकता है।



कोरोना महामारी फैलने के तकरीबन दो साल बाद भी दुनिया इसके नए-नए वेरिएंट्स से लगातार जूझती नज़र आ रही है। अभी पूरी दुनिया में जिस वेरिएंट का ख़ौफ़ है, उसका नाम है ओमीक्रोन। कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वेरिएंट से दुनियाभर का टेंशन बहुत बढ़ गया है।

आज फ़िर से दुनिया भर के लोगों में कोरोना के इस नए वेरिएंट Omicron को लेकर फ़िर से हड़कंप मच गया है। साउथ अफ्रीका के प्रान्तों में अब जो भी रोज़ाना आंकड़े आ रहे हैं उनमें लगभग 90% मामले Omicron के मामले सामने आ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह कोरोना के पिछली लहर से भी ज़्यादा तेज़ी से फैलने वाला है। यह डेल्टा वेरिएंट से भी ज़्यादा ख़तरनाक बताया जा रहा है। आशंका है कि आने वाले दिनों में इसका ख़तरा तेज़ी से बढ़ सकता है। हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। इस वेरिएंट पर वैक्सीन कितनी असरदार हो सकती है? इसका अंदाज़ा लगाना फ़िलहाल मुश्किल है। 

ओमिक्रोन का पता कैसे चला?


मंगलवार 22 नवंबर को इसकी पहचान हुई। शुरुआती ख़बर यह आयी कि यह साउथ अफ्रीका, बोसवाना और हांगकांग में पाया गया है। लेकिन अब यह इज़राइल, बेल्जियम, इजिप्ट और टर्की तक फैल चुका है। साथ ही हॉलैंड व जर्मनी में साउथ अफ़्रीका से आये यात्रियों से फैल रहा है। इसी के चलते अमरीका, ब्रिटेन व यूरोपीय यूनियन ने अफ़्रीका के कई देशों से आने वाली फ्लाइट्स पर रोक लगा दी है। साथ ही पड़ोसी देश श्रीलंका और थाईलैंड ने भी इसी तरह आने जाने वालों पर रोक लगा दी है।


साउथ अफ्रीका, बोसवाना, ज़िम्बाब्वे व नामीबिया सहित अब दुनिया के लगभग सभी देश साउथ अफ़्रीका से आने वाली फ्लाइट्स के यात्रियों को कम से कम 10 दिन आइसोलेट कर रहे हैं। या उस तरफ़ से आने वाली फ्लाइट्स पर प्रतिबंध भी लगा रहे हैं। उनकी यही कोशिश हो रही है कि Omicron से संक्रमित देशों या साउथ अफ्रीका में जाने या आने वाली फ्लाइट्स पर जल्द से जल्द रोक लगा सकें। 


कितना ख़तरनाक है Omicron variant ?


Omicron में स्पाइक प्रोटीन म्युटिशन हैं। जो बेहद ज़्यादा संक्रामक हैं। Omicron एक ग्रीक शब्द है। covid-19 महामारी आने के बाद से ही इसके तरह-तरह के वेरिएंट सामने आ चुके हैं। वैज्ञानिक भी इस पर कड़ी नज़र जमाये हुए हैं। इस omicron की भयावहता का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि, पिछला कोरोना का वेरिएंट 100 दिनों में जितना फैला था। उतना यह वेरिएंट सिर्फ़ 15 दिनों में ही फैल चुका है। इस virus के बहुत सारे म्युटेशन्स mutations बढ़ रहे हैं। और जब कोई virus तेज़ी से म्युटेड होता है तब ऐसे virus से लड़ना सचमुच बहुत मुश्किल हो जाता है। 

दक्षिण अफ़्रीका की सरकार ने कहा है कि यह संक्रामक ज़रूर है, तेज़ी से फ़ैलता भी है लेकिन यह ज़्यादा ख़तरनाक नहीं है। लेकिन अमेरीका के चीफ़ मेडिकल एडवाइज़र डॉ. एंथनी फाउची का कहना है कि हमें इस वेरिएंट से अत्यंत सावधानी की ज़रूरत है। क्योंकि इस वेरिएंट का भी चीन से गहरा नाता है।


वैसे इस वेरिएंट को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यह कोरोना का नया वेरिएंट पिछले डेल्टा वेरिएंट से ज़्यादा घातक साबित हो सकता है। साधारणतया देखा जाए तो किसी भी वायरस में म्युटेशन mutation की प्रक्रिया सामान्य तरीक़े से होती है लेकिन इस वायरस में mutation बहुत ही असामान्य तरीके से हो रहा है। यानि कि इस वेरिएंट में mutations तेज़ और बहुत अधिक मात्रा में है। इसीलिए सारी दुनिया इसके परिणामों को लेकर दहशत आ गयी है।

ओमिक्रोन नाम कैसे पड़ा?


दरअसल WHO कोरोना के नए वेरिएंट्स को Greek Alphabets (ग्रीक अल्फाबेट्स) के लेटर्स के अनुसार नाम देता है। Omicron ग्रीक अल्फाबेट का पंद्रहवाँ लेटर है। इस लेटर्स के मिलने के पहले WHO इसके 12 लेटर्स का प्रयोग कर चुका था। इस हिसाब से उसको इस नए वेरिएंट का नाम ग्रीक अल्फाबेट्स के 13वें अल्फाबेट का नाम देना था। और ये तेरहवाँ लेटर NU था। जिसे सामान्यतः लोगो द्वारा 'न्यू' या 'नू' भी पढ़ा जा सकता था। WHO को लगा कि यदि इसे यह नाम दिया गया। तो इससे कन्फ्यूज़न पैदा होगा। इसलिए इस अक्षर को छोड़ दिया गया।  


फ़िर इसे ग्रीक अक्षर के 14वें अक्षर (Alphabet) पर रखा जाना था। वो अक्षर था XI यानि कि 'शी'। WHO को लगा कि अगर इस नए वेरिएंट को 'शी' नाम दिया गया तो तो इसे दुनिया चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping 'शी जिनपिंग' से जोड़कर देखेगी। इससे और भी बड़ी ग़लतफ़हमी होने लगेगी। और ये बात चीन और चीन के राष्ट्रपति को बुरी लग सकती है। इसलिए इस नए वेरिएंट के नामकरण के लिए 15वें अक्षर O को चुना गया। जिसे Omicron कहा गया।

क्या हैं विदेशी यात्रियों के लिए गाइडलाइन्स?


भारत सरकार ने इस नए ख़तरे को देखते हुए कई देशों को high risk की श्रेणी में रख दिया है। मतलब इन देशों से अब जो भी यात्री भारत आएंगे। उन्हें कड़ी निगरानी में रखा जाएगा। और उनके लिए प्रोटोकॉल भी सख़्त हो जाएंगे। उन्हें अब ख़ुद के ही ख़र्चे पर RT-PCR टेस्ट कराना होगा और result आने तक airport एयरपोर्ट पर ही रुकना होगा। रिपोर्ट negative आ जाने पर उन्हें अपने घर जाकर 7+7 फ़ार्मूला का पालन करना होगा। 

यह 7+7 formula क्या है? तो हम इस 7+7 फ़ार्मूले के बारे बता दें कि इनकी रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद इन्हें 7 दिनों के लिए होम कोरेन्टीन में रहना होगा। 8 वें दिन इन्हें फ़िर से कोरोना का RT-PCR टेस्ट कराना होगा। यदि इस बार भी जाँच रिपोर्ट negative आती है। तब भी इन्हें फ़िर से 7 दिनों का होम कोरेन्टीन दोबारा से करना अनिवार्य होगा। यानि कि 7 दिन पहले और 7 दिन बाद में मतलब 14 दिनों का होम कोरेन्टीन में रहना होगा। 

यदि हवाई अड्डे की जाँच की RT-PCR रिपोर्ट Positive आ जाये तो उसके सैम्पल्स को जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जाएगा। ताकि यह पता लग सके कि वह व्यक्ति कोरोना के किस वेरिएंट से संक्रमित है। संक्रमित व्यक्ति की contact ट्रेसिंग भी ज़रूरी होगी। इसके लिए उनके साथ बैठे व्यक्ति, उनके आगे पीछे की कम से कम 3 पंक्तियों के व्यक्तियों की कोरोना जाँच की जाएगी।


मान लीजिये कि यदि आपके सामने या पीछे की तीसरी पंक्ति में बैठे व्यक्ति की रिपोर्ट positive मिल गयी। तो ऐसी स्थिति में आपकी भी बाक़ायदा RT-PCR टेस्टिंग कराना होगा। सब्स अहम बात, यदि आप कहीं की यात्रा करना चाहते हैं तो एयर सुविधा पोर्टल यात्रा के 14 दिन पहले की विस्तृत ट्रेवल हिस्ट्री बतानी होगी और यात्रा के 72 घंटे पहले बाक़ायदा  कोरोना टेस्ट कराना होगा। 

जिन देशों को high risk की श्रेणी में नहीं रखा गया है। उन देशों से भी आने जाने वाले कुल यात्रियों में से लगभग 5% की रैंडम टेस्टिंग होगी। जिसका ख़र्च ख़ुद केंद्र सरकार उठाएगी। विदेशों से आने वाले यात्रियों को भी 14 दिनों का होम आइसोलेशन अनिवार्य होगा। समुद्री मार्गों से आने वाले यात्रियों को भी इसी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।

भारत में केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों की सरकारों को यह आदेश दे दिया है कि वे अपने-अपने राज्यों में सख़्ती बरतना शुरू कर दे। कोरेन्टीन और आइसोलेशन को लागू करने के साथ-साथ सभी राज्यों को RT-PCR टेस्टिंग बढ़ाने का आदेश भी जारी कर दिया है।

ओमिक्रोन क्या है? | क्या है कोरोना का ओमिक्रोन वेरिएंट


दरअसल साउथ अफ्रीका के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह म्युटेशन एक गुच्छे की तरह है जो पहले फैलने वाले वेरिएंट के मुकाबले बिल्कुल अलग है। यह स्पाइक प्रोटीन म्युटिशन है। 

"स्पाइक वह प्रोटीन होता है जो कि कोरोना वायरस के surface पर पाया जाता है। दरअसल यही वो हिस्सा होता है जहाँ पर वैक्सीन और कोविड से लड़ने के तैयार एंटीबॉडी antibodies असर करती है।"


यानि स्पाइक प्रोटीन अलग-अलग होगा तो उस पर वैक्सीन के असरदार नहीं होने की आशंका भी है। इस वेरिएंट के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन में 10 तरह के म्युटेशन हैं। रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन virus का वह हिस्सा होता है। जो सबसे पहले हमारे शरीर के सेल्स के संपर्क में आता है। डेल्टा वेरिएंट के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन में 2 ही म्युटेशन थे तभी UK के स्वास्थ्य सचिव ने कहा दिया है कि डेल्टा स्ट्रेन की तुलना में यह नया वेरिएंट ज़्यादा infection फ़ैलाने वाला है। और हमारे पास जो टीके हैं वो कम प्रभावी हो सकते हैं।

ओमिक्रोन के लक्षण | Symptoms of Omicron in hindi | ओमिक्रोन वायरस के लक्षण


कोरोना के इस नए वेरिएंट के लक्षणों की बात करें तो अब Omicron के लक्षण सामने आने लगे हैं। आइये देखते हैं कि omicron virus symptoms in hindi क्या हैं?

ओमिक्रोन वैरिएंट के लक्षण भी डेल्टा वेरिएंट के लक्षणों जैसे ही दिखाई देते हैं। ओमिक्रोन से संक्रमित होने वाले लोगों में हल्का बुख़ार और थकान जैसे शुरुआती लक्षण देखे गये हैं। डेल्टा वेरिएंट में लोगों की सूंघने की क्षमता कम हो जाती थी तथा खाने का स्वाद ही नहीं मिलता था। कुछ ऐसे ही मिलते जुलते लक्षण omicron से पीड़ित व्यक्तियों में भी देखे जाते हैं। साथ ही गले में ख़राश, सिरदर्द खुजली और दर्द, दस्त, त्वचा के चकत्ते आना, लाल या सूजी हुई आंखें आदि कोरोना के इस नए वेरिएंट के लक्षण होते हैं।


ओमिक्रोन पर वैक्सीन का असर

वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी संभावना बहुत कम है। सवाल यह उठता है कि वैक्सीन का असर बहुत ज़्यादा होगा या बहुत कम। इसके बारे में अभी तक कोई पुख़्ता जानकारी नही है। इसलिए बस यही महत्वपूर्ण है कि इससे बचाव ही इसका उपाय है। इसके लिए यही महत्वपूर्ण है कि समय रहते सुरक्षा के लिए सभी कदम उठा लिए जाएं। वैसे एक study के दौरान बताया गया है कि यह कोरोना का नया वेरिएंट कोरोना टीके के दोनों डोज़ के असर को भी ख़त्म कर सकता है। यानि कि इसके सुरक्षा कवच को तोड़ सकता है।
एस्ट्राजेनेका, मॉडर्ना, नोवावैक्स और फाइजर सहित कई दवा कंपनियों ने कहा है कि ओमीक्रॉन के सामने आने के बाद उनके पास ऐसी योजनाएं हैं कि टीके नए स्वरूप के अनुकूल होंगे। हालांकि, फाइजर ने यह भी कहा है कि उसकी वैक्सीन ओमीक्रॉन पर कितनी असरदार होगी, यह कहा नहीं जा सकता। वहीं, ऑक्सफोर्ड टीका समूह के निदेशक प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने उम्मीद जताई है कि ओमीक्रॉन वेरिएंट से होने वाली गंभीर बीमारियों को रोकने में वर्तमान टीके प्रभावी हो सकते हैं।
- By Alok
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