5 सुपर फूड जो health के लिए बन जाते हैं बेड फूड | 5 super foods you should never eat in hindi

इन 5 फूड्स को कभी भी ग़लत तरीके से नहीं खाना चाहिए


दोस्तों आज हम आपको 5 ऐसे सुपर फूड (super food) के बारे में बताएंगे जो हेल्थ के लिए super useful हैं। लेकिन अगर हम इनका सही तरीक़े और सही समय पर use ना करें तो ये हमारे लिए किसी poison (ज़हर) से कम नहीं। ये ऐसे सुपर फूड हैं जिसकी advoise हर हैल्थ एक्स्पर्ट के द्वारा और हर जिम ट्रेनर (gym trainor) के द्वारा दी जाती है।

लेकिन इन्हें सही तरीक़े से इस्तेमाल न करने पर इनके गंभीर परिणाम देखने मिलते हैं। साथ ही कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। तो आइए बिना देर करे हम जानते हैं कि वो कौन से 5 सुपर फूड हैं जिनका सेवन नहीं करना चाहिए? (which are the 5 super foods that should not be consumed in hindi?)


(1) ब्राउन राइस -  


ब्राउन राइस, चावल का बना refined किया हुआ natural part है। इस चावल के दाने पर पाए जाने वाले भूरे रंग के कारण ही इसे (brown rice (भूरा चावल) का नाम दिया गया है। इसकी ख़ासियत की बात की जाए तो यह सामान्य चावल यानि कि सफ़ेद चावल की अपेक्षा पकने में अधिक समय लेता है और इसका स्वाद भी सामान्य चावल से अलग होता है।

ऐसा माना जाता है कि इसमें सफ़ेद चावल के मुक़ाबले अधिक पोषक तत्व, विटामिन्स व मिनरल्स पाए जाते हैं। इसका कारण यह है कि यह चावल दुकानों या गोदामों में सीधे किसानों द्वारा बिना किसी पॉलिश के पहुंचाया जाता है। इसमें केवल धान के ऊपर से इसका हिस्सा उतारा जाता है।

परन्तु इसके इतने सारे अनगिनत फ़ायदे होने के बाद भी अगर हम इसका सही तरीक़े से और सही समय पर उपयोग न करें तो हमें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसका सबसे सीधा व सबसे बड़ा कारण यह होता है कि हर तरह के चावल में आर्सेनिक बड़ी मात्रा में पाया जाता है। आर्सेनिक एक बहुत ही हानिकारक तत्व है। जिसके किसी भी तरह के सेवन से शरीर को गंभीर नुक़सान हो सकते हैं 

हाल ही में इंग्लैंड की क्वीन यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पता चला है कि खेतो में पाए जाने वाली मृदा (मिट्टी) में उपस्थित औद्योगिक ज़हरीले (विषाक्त) पदार्थ और कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी ज़हरीली बन जाती है। जो कि मृदा के द्वारा सीधे खाद्य पदार्थ जैसे कि गेहूं या चावल या दालों में पहुंच जाती है।


इस तरह के खाद्य पदार्थों के सेवन से आर्सेनिक प्वाइजनिंग का संकट भी पैदा हो सकता है। और आर्सेनिक हमारी बॉडी के अंदर जाकर हमारे शरीर में कैंसर जनक स्थिति पैदा करती है। और यह आर्सेनिक चावल में खेतों में खाद्य पदार्थों में छिड़के जाने वाले कीटनाशक एवं प्रेस्टिसाइज़ के द्वारा खाद्य पदार्थों में जाता है। और चावल में एक विशेषता यह पाई जाती है कि चावल, आर्सेनिक को मृदा के अंदर से अधिक absorb करता है।

चावल के अंदर ये प्रेस्टिसाइज़ अवशोषित (absorb) करने की capacity अधिक होती है। और जब हम इन चावलों को ग़लत तरीके से use करते हैं तो यह आर्सेनिक हमारी बॉडी में धीरे धीरे जमा होते हुए विशाल रूप धारण कर लेता है। और धीरे धीरे यह कैंसर पैदा करने का कारण बन जाता है। 

अगर हम तुलना करें brown rice और normal rice की तो ब्राउन राइस अधिक harmful होते हैं। क्योंकि ये बिना किसी processing के, खेत से direct हमारे पास पहुंचते हैं। तो आइए अब ये जानते हैं कि किस तरह से ब्राउन राइस का उपयोग किया जाए कि इसके harmful होने से बचा जा सके।

1. इसके लिए आप चावल को कम से कम सबसे पहले 10 से 15 मिनट भिगोकर रखें।
2. चावल को कम से कम 3 से 4 बार धोएं।
3. चावल को हल्के गुनगुने पानी से धोने की आदत डालें।
5. चावलों को धोते समय चुटकी भर नमक का प्रयोग भी करें। क्योंकि नमक use करने से चावल में उपस्थित किसी भी प्रकार का इंफेक्शन या कीटनाशक ख़त्म हो जाता है।


(2) आलू का हरा भाग -

आलू के हरे भाग को खाने के नुक़सान

आलू हमारे दैनिक जीवन में खाने पीने की मुख्य खाद्य सामग्री का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूं कहा जाए कि आलू के बिना कोई सब्ज़ी, कोई व्यंजन या कोई भी स्पेशल डिश बनाना मुश्किल हो जाता है। आलू छोटे से बड़े एवं बुज़ुर्ग सभी को बहुत पसंद भी आता है। ख़ास तौर से हमारे भारतीय व्यंजन तो बिना आलू के अधूरे से लगते हैं। और हो भी क्यों न। क्योंकि आलू में कार्बोहाइड्रट, स्टार्च और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। 

यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा कि आलू सेहत और स्वाद का भरपूर combination है। आलू इतना अधिक फ़ायदेमंद है लेकिन इसमें पाए जाने वाला हरा भाग जो कि आलू की properties बढ़ाने के बजाय कम के देता है।  हरा भाग जो कि आलू में पाया जाता है दो कारणों से होता है - पहला क्लोरोफिल जो कि एक पिगमेंट होता है। जो उसको हरा कलर देता है। और दूसरा कारण सोलेनेसी (Solanaceae) है जो एक न्यूरोटोक्सिक है जो कि हमारे शरीर में विषैले तत्वों की मात्रा बढ़ा देता है। ये शरीर के अंदर जाकर ज़हर का काम करता है। Solanaceae की अधिक मात्रा के सेवन से हमारे शरीर में कुछ ऐसे विनाशकारी परिवर्तन होते हैं जिसे हम धीरे धीरे महसूस करते हैं। 


ये शरीर में बड़े ही गंभीर परिणाम लेकर आते हैं जैसे कि जी मचलाना, उल्टी, चक्कर आना, आंतरिक रक्त स्त्राव (internal bleeding), पैरासिसिल एवं हार्टअटैक, कोमा आदि। इसलिए आपको सब्ज़ियां, विशेष तौर पर आलू लेते वक्त यह ध्यान रखना चाहिए कि आलुओं को अच्छी तरह देख परखकर साफ़ एवं फ्रेश आलुओं को ही ख़रीदा जाए। हरे आलुओं को ऐसी जगह फेंका जाए या नष्ट (destroy) किया जाए जहां वह पशु पक्षियों के खाने में भी न आ पाएं पाए। 

अगर आपको आलू का कोई भाग हरा दिखाई दे तो उस भाग को काट कर फेंक दें और बाक़ी का भाग अच्छी तरह साफ़ करके ही उपयोग में लाएं। इस तरह से आप अपने आलू के शौक़ को पूरा कर सकते हैं। और अपनी सेहत का भी ध्यान रख सकते हैं। कुछ विशेष case study में पाया गया है कि केवल कुछ ग्राम हरे आलू के भाग के सेवन से, जिसमें Solanaceae पाया जाता है, से मानव को अत्यंत गंभीर परिणाम तक भोगने पड़ सकते हैं।



(3) कड़वे बादाम -

कड़वे बादाम खाने के नुक़सान

जी हां जहां बादाम का नाम आ रहा है तो आप ज़रूर थोड़ा confuse हो गए होंगे लेकिन ये बात सच है कि बादाम भी healthy, delicious एवं tasty होने के साथ ही कुछ बादाम हमारे शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक एवं घातक हो सकते हैं। दरअसल हमारे देश में बादाम की 2 केटेगरी होती है। जिसमें एक है मीठे बादाम (sweet almonds) एवं कड़वे बादाम (bitter almonds) 

जहां मीठे बादाम, सेहत एवं स्वाद का खज़ाना है वहीं कड़वे बादाम हमारे स्वास्थ्य के लिए ज़हर के समान हैं। कड़वे बादाम में भारी मात्रा में हाइड्रोसायनिक एसिड (hydrocyanic acid) होता है जो हमारे श्वसन तंत्र (breathing system) एवं नर्वस सिस्टम को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यहां तक कि इसके गंभीर परिणाम में हार्ट से भी संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। यह इतना अधिक नुक़सानप्रद होता है कि गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसके सेवन के लिए सख़्त मनाही कर दी जाती है। कड़वे बादाम के सेवन से हमें पाचनतंत्र संबंधी, वज़न संबंधी एवं हमारे शरीर में विषैले तत्वों के एकत्रीकरण जैसी समस्याएं हो सकती है। 


इसलिए हमें कड़वे बादाम के सेवन से बचना चाहिए। इसके लिए हम जब भी दुकान या पंसारी से बादाम ख़रीदें तब विशेष ध्यान रखें। मीठे बादाम के सेवन से आप अपने स्वास्थ्य को बहुत अधिक लाभ एवं अनेक स्वास्थ्य संबंधी फ़ायदे पहुंचा सकते हैं। मीठे बादाम का सेवन छोटे से बड़े एवं बुज़ुर्ग तक सभी चाव से खाते हैं। इसलिए इन्हें अपनी डाइट में ज़रूर शामिल करें एवं कड़वे बादाम के सेवन से बचें।


(4) जायफल -

जायफल के अत्यधिक सेवन से होने वाले नुक़सान

जायफल हमारे भारतीय व्यंजनों में सबसे महत्वपूर्ण औषधि या मसाला माना जाता है। दोस्तों जायफल का प्रयोग हम अपने खाने में औषधि के रूप में अलग अलग तरह से करते हैं। जैसे हम इसे कभी कुछ मीठा व्यंजन एवं कभी कुछ चटपटा मसालेदार व्यंजन बनाने में प्रयोग करते हैं। यह प्राचीनकाल ही उपयोग में आने वाला प्रमुख फल है। क्योंकि यह विभिन्न पोषक तत्वों एवं अनेक औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। 

इसके साथ ही इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटी माइक्रो बियत, एंटी ऑक्सिडेंट जैसे तत्व भी पाए जाते हैं। अगर इसका उचित मात्रा एवं उचित समय पर प्रयोग किया जाए तो यह एंटी एजिंग के गुणों से हमें लाभान्वित करता है। जायफल के अनेक गुणों में पाचन तंत्र दुरुस्त करने में, दर्द निवारक अर्थात पेन किलर के रूप में, नींद न आने की समस्या में, गठिया वात में जोड़ों के दर्द की समस्या में एवं कई घातक बीमारियों जैसे कैंसर, हार्ट डिसीज़, मधुमेह एवं मोटापा कम करने में भी अत्यंत लाभकारी है।


परन्तु जायफल के इतने अधिक लाभकारी एवं औषधीय गुण होने के बाद भी जायफल का नियमित एवं संतुलित रूप से सेवन न करने से हमें गंभीर एवं बहुत भयंकर दुष्परिणाम देखने मिल सकते हैं। इसके दुष्परिणाम में भयंकर सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी एवं ब्लड प्रेशर संबंधी कई भयंकर परेशानियां देखने मिलती हैं। डॉक्टर या आयुर्वेदिक वैद्य इसे विभिन्न घरेलू नुस्खों के साथ साथ चेहरे पर लेपन के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। 

ख़ास तौर से जब नवजात शिशुओं को सर्दी ज़ुकाम हो जाता है तब उसे मां के दूध में घिसकर या गाय के दूध में देने की सलाह दी जाती है। लेकिन इसे देते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसके अधिक मात्रा के सेवन से शिशु को परेशानी हो सकती है। इसका यदि मुहांसे एवं फुंसी दूर करने के लिए आप चेहरे पर लेप की तरह उपयोग करते हैं तो इसे सीमित मात्रा में और सीमित समय तक ही प्रयोग करें अन्यथा इसके दुष्प्रभाव से आपका पूरा चेहरा ख़राब हो सकता है।



(5) अधपका अनाज -

अधपके खाद्य पदार्थ खाने के नुक़सान

जी हां दोस्तों, जहां अनाज हमारे दैनिक जीवन का बहुत ही अहम एवं महत्वपूर्ण भाग है। वहीं अगर इस अनाज को हम ग़लत तरीके या ग़लत रूप में ग्रहण करें तो यही अनाज हमारे लिए प्राणदायक होने के बजाय प्राणलेवा हो सकता है। जैसे अधपका चावल, अधपकी दालें, अधपका राज़मा और अधपकी रोटियां आदि। ये सारी चीज़ें जो आप रोज़ खाते हैं। कभी ऑफिस तो कभी स्कूल की जल्दबाज़ी में कच्चा पका ही खा लेते हैं। जो पेट में जाकर अधपचे भोज्य पदार्थ के रूप में इकट्ठे हो जाते हैं तथा कई दिनों तक पेट की आंतों में चिपके व फंसे रह जाते हैं। 

ये इतने अधिक ज़िद्दी एवं ख़तरनाक होते हैं कि हमारे शरीर में इतनी अधिक कब्ज़ एवं गंदगी फैलाते हैं कि जिन्हें साफ़ करने के लिए कितनी ही गैस की गोलियां, कितने ही चूर्ण एवं कितने ही प्रयत्न कर लें मगर ये आसानी से बाहर नहीं आते। परिणास्वरूप ये पेट में कई तरह की बीमारियों का कारण बनते हैं।


इसलिए आज के समय में खाने को अच्छी तरह से साफ़ एवं अच्छी तरह से पकाकर खाना बहुत ज़रूरी हो गया है।एक तो ये अनाज पहले से ही इतने अधिक कीटनाशक एवं प्रेस्टीसाइज़ से मिले होते हैं। ऊपर से इनको यदि सही तरह से साफ़ व उचित रूप से पकाया न जाए तो ये किसी गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेते हैं। जिन्हें महंगे महंगे इलाज से भी ठीक नहीं किया जा सकता। ये अल्सर, पेट के कीड़े एवं कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण भी बनते हैं। इसलिए आप सभी से request है कि आप सभी इन  बातों का ध्यान रखते हुए अपना एवं अपनों का ख़्याल रखें। यही जीवन की सच्ची सेवा होगी।

(- By Poonam)

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